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बिहार में गंगा नदी पर 2022 तक तैयार हो जाएगा, पहला हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल पुल, निर्माण अधिकारी ने दी जानकारी

बेगूसराय और पटना के बीच गंगा नदी पर बन रहा एशिया का दूसरा और बिहार का पहला हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल सिक्स लेन पुल अगले साल 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा. 14 अक्टूबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यहां आकर शिलान्यास करने के बाद से ही वेल स्पॉन एजेंसी की देखरेख में एसपी सिंगला कंपनी के द्वारा निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है.
बिहार में गंगा नदी पर 2022 तक तैयार हो जाएगा, पहला हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल पुल, निर्माण अधिकारी ने दी जानकारी

बेगूसरायः बेगूसराय और पटना के बीच गंगा नदी पर बन रहा एशिया का दूसरा और बिहार का पहला हाइब्रिड एन्युइटी मॉडल सिक्स लेन पुल अगले साल 2022 तक बनकर तैयार हो जाएगा. 14 अक्टूबर 2017 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा यहां आकर शिलान्यास करने के बाद से ही वेल स्पॉन एजेंसी की देखरेख में एसपी सिंगला कंपनी के द्वारा निर्माण कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है. कोरोना संक्रमण के दौरान भी काम रुका नहीं. हालांकि अब बरसात में गंगा नदी का जल स्तर बढ़ने पर काम में कुछ बाधा आ सकती है. लेकिन कार्यकारी एजेंसी ने तैयारी ऐसी की है ताकि बारिश के दौरान नदी के हिस्से को छोड़कर शेष हिस्से में काम अनवरत चलता रहे.

वहीं, पुल निर्माण में जुटे कंपनी के एक अधिकारी ने बताया कि अगर सब कुछ ठीक रहा तो करीब 1150 करोड़ की लागत से बन रहा 1.8 किलोमीटर लंबा यह सिक्स लेन पुल अगले साल 2022 के दिसंबर तक बनकर तैयार हो जाएगा. पहले जुलाई 2022 में ही निर्माण कार्य पूरा होना था, लेकिन बीच-बीच में कुछ रुकावट आ जाने के कारण अब दिसंबर तक निर्माण कार्य पूरा होने की उम्मीद है. पुल के 17 पीलर में से छह पीलर का काम पूरा होने के बाद उस पर सड़क निर्माण का बेस सेगमेंट चढ़ाने का कार्य शुरू कर दिया गया है. पटना जिले की ओर से हाथीदह में पीलर संख्या एक, दो एवं तीन पर सेगमेंट चढ़ाने का काम अंतिम चरण में है.

उल्लेखनीय है कि आजादी के बाद पूर्वोत्तर भारत को देश के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह के नेतृत्व में यहां रेल-सह-रोड पुल बनाया गया था. 80 के दशक से पुल की स्थिति धीरे-धीरे बिगड़ने लगी तो मरम्मत का कार्य शुरू हुआ, साल दर साल में लाखों-लाख खर्च होने लगे. लेकिन बार-बार मरम्मत के बावजूद लगातार दुरुस्त नहीं रह सका. 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सत्ता संभालते ही यह जानकारी मिली तो उन्होंने नया पुल का निर्णय लिया और खुद आकर शिलान्यास किया.

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