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इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला , महिलाएं आनंद की वस्तु नही, विशेष कानून बनाए जाने की जरुरत.

शादी का झूठा वादा कर महिलाओं का यौन उत्पीड़न किये जाने के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिये विशेष कानून बनाए जाने को कहा है.
इलाहाबाद हाईकोर्ट का बड़ा फैसला , महिलाएं आनंद की वस्तु नही, विशेष कानून बनाए जाने की जरुरत.

लखनऊः शादी का झूठा वादा कर महिलाओं का यौन उत्पीड़न किये जाने के मामलों को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. हाईकोर्ट ने ऐसे मामलों पर अंकुश लगाने के लिये विशेष कानून बनाए जाने को कहा है. जानकारी के मुताबिक हाईकोर्ट ने सुझाव देते हुए कहा है कि विधायिका को इस तरह के मामलों को रोकने के लिये ऐसा विशिष्ट कानून बनाना चाहिये जिसमें सभी पहलों स्पष्ट हो. आपकों बता दे कि सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अहम टिप्पणी भी की है और कोर्ट ने कहा कि महिलाओं  को सिर्फ आनंद की चीज समझने की पुरुषों की सामंती मानसिकता और उनकी वर्चस्ववाद की सोच से सख्ती से निपटे जाने के लिये विशोष कानून की जरुरत है.

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार से कानून बनाने को कहा

शादी का वादा कर महिलाओं से शारीरिक संबंध बनाने वालों पर सख्त कार्रवाई के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने योगी सरकार से कानून बनाने को कहा है. हाईकोर्ट ने ऐसी घटनाओं पर रोक के लिए सरकार से मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने को कहा है. कोर्ट ने कहा ''महिलाएं आनंद की वस्तु हैं'' ऐसी वर्चस्ववादी मानसिकता से सख्ती से निपटना जरूरी है.ताकि महिलाओं में सुरक्षा की भावना और लैंगिक असमानता को दूर करने के संवैधानिक लक्ष्य को पाया जा सके.जस्टिस प्रदीप कुमार श्रीवास्तव की एकलपीठ ने यह आदेश दिया . 

शादी करने का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना दुष्कर्म
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा शादी करने का झूठा वादा कर यौन संबंध बनाना दुष्कर्म के श्रेणी का अपराध होना चाहिए. शादी के नाम पर महिलाओं को आसानी से शिकार बनाया जा रहा है. कोर्ट ने कहा ऐसे मामलो में अदालते मूकदर्शक नहीं बन सकती हैं. यौन उत्पीड़न करने वालों को लाइसेंस नहीं दिया जा सकता, जो मासूम लड़कियों का शोषण करतें हैं. 

महिला के जीवन और मस्तिष्क पर पड़ता है बुरा प्रभाव-  हाईकोर्ट

हाईकोर्ट ने आगे कहा कि दुष्कर्म जैसी घटनाओं के बाद महिला के जीवन और मस्तिष्क पर बुरा प्रभाव पड़ता है. सरकार ऐसे मामलों से निपटने के लिये स्पष्ट और विशोष कानूनी ढांचा तैयार करे. खासकर एक बार या फिर कम समय के लिए यौन संबंध बनाने के मामलो पर यह कानून जरूर लागू हो.कोर्ट ने कहा जब तक कानून नहीं बन जाता, तब तक ऐसी घटनाओं में पीड़ित महिलाओं को मानवीय आधार पर सरंक्षण दिया जाए. 

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