विश्व महासागर दिवस: महासागरों में बढ़ते प्लास्टिक कचरे से कई समुद्री जीव विलुप्त होने के कगार पर

अच्युत द्विवेदी

पृथ्वी पर जीवन का अस्तित्व बनाए रखने के लिए सहायक महासागरों के प्रति जागरूकता के उद्देश्य से हर साल यह दिवस मनाया जाता है.  8 जून 2009 को पहला विश्व महासागर दिवस मनाया गया. उसके बाद से यह हर साल मनाया जाने लगा. इस वर्ष की थीम है - प्लास्टिक प्रदूषण को रोकना और स्वस्थ महासागर के लिए समाधान.  इस दिवस को मनाने का प्रमुख कारण लोगों में महासागरों के महत्व और उनकी चुनौतियों के बारे में जागरूकता पैदा करना है. इसके साथ ही इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं जैसे खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता, पारिस्थिति संतुलन, सामुद्रिक संसाधनों के अन्धा धुंध उपयोग, जलवायु परिवर्तन आदि पर प्रकार डालना है.

आपको बता दें कि दुनिया में 5 महासागर हैं - प्रशांत महासागर, अटलांटिक महासागर, हिंद महासागर, अंटार्कटिक महासागर और आर्कटिक महासागर. हिंद महासागर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा महासागर है. पृथ्वी की सतह पर उपस्थित पानी का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसमे मौजूद है. यह विश्व का एकमात्र ऐसा महासागर है जिसका नाम किसी देश पर रखा गया है. इसकी धारा का बहाव  गर्मी में भारत की ओर तो सर्दियों में अफ्रीका की ओर होता है.

महासागर असीम जैव विविधता का प्रतीक है. आज विश्व की करीब 30 प्रतिशत जनसंख्या तटीय क्षेत्रों में निवास करती है. यही वजह है कि विश्व के सबसे विशालकाय जीव ब्लू व्हेल से लेकर असंख्य सूक्ष्म जीवों को रहने के लिए ठिकाना मुहैया कराने वाले महासागर आज इंसानी गलतियों के कारण प्रदूषित हो रहे है.

महासागरों के अंदर जीवन के कई रूप देखने को मिलते हैं. एक ओर जहां विशालकाय व्हेल, छोटी मछलियाँ या जीव हैं तो वहीं दूसरी ओर वनस्पतियों की कई किस्में हैं. यहाँ डरावनी शक्लें वालें ड्रैगन जैसी दिखने वाली मछलियाँ, चमकीली मछलियां, लैंप जैसे आँखों वाली मछलियां, जैली फिश, स्टार फिश, रंग बदलने वाली मछलियों की हजारों प्रजातियां पाई जाती है. विशालकाय समुद्री सांप की हजारों प्रजातियां, भयानक भुजाओं वाले आक्टोपस, लाखों किस्म के बैक्टीरिया और कीड़े मकोड़े आदि पाए जाते हैं. अगर हम बात महासागरों में पाए जाने वाले वनस्पतियों की करें, तो यहां कमल जैसे दिखने वाले रेंगते फूल, ब्लड रेड समुद्र फेनी, रेंगने और कई भुजाओं वाले पौधे, कोरल और रंगीन शैवाल समेत लाखों वनस्पतियां पाई जाती है.

महासागरों में हजारों तरह की सुरंगे है जो ऑक्सीजन और पानी से भरी होती है. इनका पानी बहुत साफ होता है इसके अलावा समुद्र में गुफाएं भी पाई जाती हैं. कहा जाता है कि जब बड़ी बड़ी लहरें चट्टानों से टकराती है तो उसमे सुराख कर देती है. यही सुराख धीरे धीरे गुफा का रूप धारण कर लेती हैं. समुद्री लहरों, भूकंपों और ज्वालामुखी के कारण भी गुफाएं बन जाती है. महासागरों के अंदर पर्वत भी पाए जाते हैं. इनमे से कुछ छोटे होते है तो कुछ विशालकाय. आमतौर पर इन पर्वतों की ऊंचाई 1 से 3 किमी तक होती है. अधिकांश पहाड़ पानी में डूबे हुए होते है. समुद्र के पानी से ऊपर उठे हुए चपटे पहाड़ों को द्वीप कहते हैं. आपको जानकार आश्चर्य होगा कि हवाई द्वीप का निर्माण ऐसे ही हुआ है.

क्यों जरुरी है महासागर

महासागर धरती के मौसम को निर्धारित करने के प्रमुख कारक हैं. इनमे मौजूद पानी की लवणता और विशिष्ट ऊष्माधारिता का गुण पृथ्वी के मौसम को प्रभावित करता है.आज महासागर अपनी अस्तित्व को बचाने के लिए जूझ रहा है. महासागरों में प्रदूषण आज पूरे विश्व के लिए चिंता का सबब बना हुआ है. आज अत्यधिक मात्रा में तेल का दोहन हो रहा है. जिससे तेल महासागरों की सतह पर फैल जाता है, इससे हजारों मछलियों की मौत हो जाती है. इसके अलावा महासागरों में पाई जाने वाली गन्दगीयों में प्लास्टिक सबसे ज्यादा पाई जाती है.हालात यह है कि अगर आज समुद्र मंथन किया जाय तो ये चीजें बाहर आएंगी:

-सिगरेट के टुकड़े 

-फूड पैकिंग 

-प्लास्टिक की बोतलें 

-प्लास्टिक बैग 

-कप और प्लेट. 

-स्ट्रॉ 

-बोतलों के ढक्कन 

प्लास्टिक प्रदूषण को हम निम्न तरीके से रोक सकते हैं:

-रिड्यूज 

-रियूज

-रिसाइकिल 

-कचरे का सही निष्कासन और निस्तारण करके 

-अपने क्षेत्र की साफ सफाई करके

 

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