अमेरिका-तालिबान शांति समझौते का क्या होगा भारत पर असर

अमेरिका (America) अफगानिस्तान (Afghanistan) में तालिबान (Taliban) के साथ बेहद अहम शांति समझौता (Peace Deal) करने जा रहा है. इस समझौते पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं. कतर के दोहा में होने वाले इस शांति समझौते के 30 देश गवाह बनेंगे, इसमें भारत भी शामिल होगा. पहली बार तालिबान के साथ किसी तरह के समझौते में भारतीय प्रतिनिधि भी मौजूद होंगे. इस समझौते के बाद अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का रास्ता साफ हो जाएगा. लेकिन सवाल है कि इस समझौते से क्या हासिल होगा? अमेरिका किस आधार पर तालिबान के साथ समझौता कर रहा है और इसका भारत पर क्या असर पड़ने वाला है.

तालिबान के साथ डील को लेकर उठते रहे हैं सवाल
तालिबान के साथ अमेरिकी शांति समझौता यूएस प्रेसीडेंट डोनाल्ड ट्रंप की स्ट्रैटजी का हिस्सा है. उन्होंने अमेरिकी चुनावों में वादा किया था कि अगर वो सरकार में आते हैं तो वार जोन में लगे अमेरिकी सैनिकों को वापस बुलाया जाएगा. ये शांति समझौता उसी वादे का हिस्सा है. हालांकि इस शांति समझौते को लेकर अमेरिका में विवाद रहा है.

इस शांति समझौते की मुखालफत खुद अमेरिका के रक्षामंत्री रह चुके जेम्स मैट्टिस ने की थी. डोनाल्ड ट्रंप के तालिबान से डील की बात पर अड़े रहने की वजह से विरोध स्वरूप उन्होंने रक्षामंत्री पद से इस्तीफा दे दिया. जेम्स मैट्टिस के साथ-साथ कई अमेरिकी विशेषज्ञों का लगता है कि ये अमेरिका का घातक कदम है, जो अफगानिस्तान और उसके आसपास के इलाकों में अस्थिरता को बढ़ावा देगा.

कुछ अमेरिकी विशेषज्ञ मानते हैं कि डोनाल्ड ट्रंप ने ये फैसला आने वाले राष्ट्रपति चुनाव के मद्देनजर लिया है. वो अमेरिकी खर्चों में कटौती करके देश के सामने स्थिरता लाने का भरोसा पैदा करना चाहते हैं. लेकिन उनका ये दांव उलटा भी पड़ सकता है. अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों के कदम वापस खींचने का उलटा असर भी पड़ सकता है. और इसकी वजह से पूरे इलाके की स्थिरता प्रभावित हो सकती है.

भारत पर क्या होगा इस कदम का असर
हालांकि भारतीय प्रतिनिधि इस शांति समझौते में शामिल हो रहे हैं. लेकिन भारत इस दिशा में लगातार चिंता जताता आया है. अफगानिस्तान से अमेरिकी सैनिकों की वापसी का विपरित असर भारत पर पड़ सकता है. तालिबान कश्मीर में गड़बड़ी फैला सकता है. ये पूरी दुनिया जानती है कि तालिबान के हक्कानी नेटवर्क ने अफगानिस्तान में भारतीय दूतावास पर हमले किए हैं. हक्कानी नेटवर्क कश्मीर में भी गड़बड़ी फैलाना चाहता है.अब अमेरिका उसी हक्कानी नेटवर्क वाले तालिबान के साथ शांति समझौता कर रहा है. इससे अफगानिस्तान में हक्कानी नेटवर्क का प्रभाव बढ़ेगा. इसके अगले चरण में वो अफगानिस्तान की सरकार से बातचीत करेंगे. तालिबान और उसके हक्कानी नेटवर्क के अफगानिस्तान की मुख्य धारा की राजनीति में आना, किसी भी तरह से भारतीय हितों के लिए ठीक नहीं है.

तालिबान के डिप्टी हेड और हक्कानी नेटवर्क के मुखिया सिराजुद्दीन हक्कानी ने शांति समझौते को बहाल करने का वादा किया है. पिछले कुछ हफ्तों में अफगानिस्तान में कोई बड़ा हमला नहीं हुआ है. तालिबान ने शांति समझौते में वादा किया है कि वो अफगानिस्तान की धरती से आतंकवाद को बढ़ावा नहीं देगा और अल कायदा के आतंकियों को पनाह नहीं देगा. इसके बदले में अमेरिकी सैनिक अफगानिस्तान की धरती छोड़ देंगे.

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