Vikas Dubey Encounter: विकास दुबे ढेर, विपक्ष ने मुठभेड़ पर सवाल उठाते हुए की जांच की मांग | 10 बड़ी बातें

लखनऊ: कानपुर के बिकरू गांव में आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले का मुख्य आरोपी विकास दुबे को आज सुबह कानपुर के भौती इलाके में कथित पुलिस मुठभेड़ में मारा गया. पुलिस के अनुसार उज्जैन से कानपुर लाते समय हुए सड़क हादसे में एक पुलिस वाहन के पलटने के बाद कुख्यात अपराधी दुबे ने भागने का प्रयास किया. मुठभेड़ को विपक्षी पार्टियां फर्जी बता रही है. पढ़ें 10 बड़ी बातें-

 

1. क्यों बनी गोली मारने की परिस्थिति?: पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल ने बताया कि सड़क हादसे के बाद दुबे ने मौके से भागने का प्रयास किया, जिसके बाद हुई मुठभेड़ में वह मारा गया. वहीं, पुलिस वाहन पलटने से पुलिस निरीक्षक सहित चार पुलिसकर्मी घायल भी हो गए, जिनमें से एक की हालत गंभीर है.

 

2. विकास दुबे को लगी चार गोली: इस बीच गणेश शंकर विद्यार्थी मेडिकल कॉलेज (जीएसवीएम) के कार्यवाहक प्राचार्य डा आर बी कमल ने संवाददाताओं को बताया कि दुबे को अस्पताल में पूरी तरह से मृत अवस्था में लाया गया था . उन्होंने कहा कि दुबे के शरीर पर चार घाव दिखे, जिनमें से तीन सीने पर और एक हाथ में थे . हालांकि, इसके बारे में बाकी जानकारी पोस्टमार्टम होने के बाद पता चलेगी .

 

3. किया गया कोरोना टेस्ट: कमल ने बताया कि दुबे का कोरोना टेस्ट भी करवाया गया और उसकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आयी है . उन्होंने बताया कि इसके बाद दुबे का शव पोस्टमार्टम के लिये पुलिस को सौंप दिया गया . सिंह ने कहा कि विस्तृत जानकारी के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट को इंतजार है.

 

4. कल गिरफ्तार हुआ था विकास: विकास दुबे को बृहस्पतिवार को मध्य प्रदेश के उज्जैन में गिरफ्तार किया गया था. गौरतलब है कि दो तीन जुलाई की दरमियानी रात कानपुर के चौबेपुर इलाके के बिकरू गांव में विकास दुबे को गिरफ्तार करने गए पुलिस दल पर दुबे और उसके साथियों ने गोलियां बरसाई थीं, जिसमें एक पुलिस उपाधीक्षक समेत आठ पुलिसकर्मी मारे गए थे.

 

5. मारे जाने से पहले सुप्रीम कोर्ट में याचिका: विकास दुबे के मारे जाने से कुछ घंटे पहले उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दाखिल कर उत्तर प्रदेश सरकार और पुलिस को उसकी जान की हिफाजत करने का निर्देश देने की मांग की गई थी, साथ ही यह सुनिश्चित करने की भी मांग की गई थी कि वह पुलिस के हाथों न मारा जाए. याचिका में यह मांग भी की गई थी कि पिछले सप्ताह आठ पुलिसकर्मियों की हत्या के मामले में कथित तौर पर दुबे के साथ शामिल रहे पांच सह-आरोपियों की मुठभेड़ में मारे जाने के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज की जाए और शीर्ष अदालत की निगरानी में सीबीआई से जांच कराई जाए.

 

6. प्रियंका गांधी ने उठाए सवाल: दुबे की कथित मुठभेड़ में मारे जाने के बाद कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने शुक्रवार को सवाल किया कि अपराधी का अंत हो गया, लेकिन अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या होगा. उन्होंने ट्वीट किया, ‘‘अपराधी का अंत हो गया, अपराध और उसको सरंक्षण देने वाले लोगों का क्या?’’

 

7. 'सरकार पलटने से बचाई गई': इस घटनाक्रम पर समाजवादी पार्टी के सुप्रीमो अखिलेश यादव ने कहा कि यह कार पलटी नही है, राज खुलने से, सरकार पलटने से बचायी गयी है. उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा, ''दरअसल यह कार नही पलटी है, राज खुलने से सरकार पलटने से बचाई गयी है .''

 

8. मायावती ने की जांच की मांग: दुबे के कथित मुठभेड़ में मारे जाने पर बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने कहा कि पूरे मामले की उच्चतम न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच होनी चाहिये. मायावती ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर कहा, ''कानपुर पुलिस हत्याकाण्ड के मुख्य आरोपी दुर्दान्त विकास दुबे को मध्यप्रदेश से कानपुर लाते समय आज पुलिस की गाड़ी के पलटने और उसके भागने पर यूपी पुलिस द्वारा उसे मार गिराए जाने आदि के समस्त मामलों की माननीय उच्चतम न्यायाय की निगरानी में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.''

 

9. कॉल डिटेल जारी करे सरकार: इस बीच घटनाक्रम पर कांग्रेस ने सवाल किया कि दुबे के पास ऐसे क्या राज थे जो शासन से गठजोड़ को उजागर करते. पार्टी के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ‘‘अगर उसे भागना ही था, तो उसने उज्जैन में आत्मसमर्पण ही क्यों किया? उस अपराधी के पास क्या राज थे जो सत्ता-शासन से गठजोड़ को उजागर करते? पिछले 10 दिनों की कॉल डिटेल जारी क्यों नहीं की जाए?’’

 

10. विकास के अलावा पांच अन्य ढेर: बिकरू कांड के बाद से उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ हुई अलग-अलग मुठभेड़ों में दुबे के गिरोह के पांच सदस्य मारे गये हैं. तीन जुलाई की सुबह ही बिकरू गांव में हुई मुठभेड़ में प्रेम प्रकाश पांडेय और अतुल दुबे मारे गये थे . आठ जुलाई को हमीरपुर के मौदहा में पुलिस ने 50 हजार रुपये के इनामी बदमाश और विकास के खास अमर दुबे को मार गिराया था. वहीं नौ जुलाई को कानपुर मुठभेड़ में कार्तिकेय उर्फ प्रभात जबकि इटावा मुठभेड़ में प्रवीण उर्फ बउवा दुबे मारा गया.

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