कर्नाटक में येदियुरप्पा के फेल होने की यह है 5 मुख्य वजह

तीसरी बार कर्नाटक के सीएम बने बीएस येदियुरप्पा को यह कार्यकाल भी पूरा किए बिना ही इस्‍तीफा देना पड़ा. तीन बार सीएम पद पर रहते हुए येदियुरप्‍पा का कार्यकाल पहले सात दिन, दूसरी बार 3 साल से अधिक और तीसरी बार 3 दिन का रहा.

बता दें कि वह पहली बार 2007 में सीएम बने थे. लेकिन 8वें दिन ही उनकी सरकार गिर गई थी. उस समय जेडीएस नेता एचडी कुमार स्वामी ने उन्‍हें झटका दिया था. इसके बाद 2008 में चुनाव जीतकर फिर गद्दी पर बैठे. उनकी जीत से बीजेपी का दक्षिण में द्वार खुल गया था. लेकिन तब भी कार्यकाल नहीं पूरा कर पाए. सरकार 3 साल से कुछ ज्‍यादा दिन चली.

आइए आपको बताते हैं कि आखिर बीजेपी की सत्ता में न पहुंचने की 5 वजहें कौन सी हैं: 

1- कर्नाटक में 15 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित होने के बाद 16 मई की शाम राज्यपाल वजूभाई वाला ने सबसे बड़े दल के रूप में बीजेपी को सरकार बनाने का न्‍योता दे दिया. साथ ही बहुमत साबित करने के लिए 15 दिन का समय दिया. येदियुरप्‍पा ने तुरंत शपथ ले ली लेकिन वह जानते थे कि शक्ति परीक्षण में फेल हो जाएंगे. 

 
2- इस फैसले के खिलाफ कांग्रेस-जेडीएस सुप्रीम कोर्ट चली गई. शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने फैसला सुनाया कि शनिवार शाम 4 बजे विधानसभा में सीएम येदियुरप्पा को बहुमत साबित करना है.

3- सुप्रीम कोर्ट ने शक्ति परीक्षण के लिए सबसे वरिष्‍ठतम एमएलए को प्रोटेम स्‍पीकर बनाने का आदेश दिया था. यहां भी बीजेपी ने अपने वरिष्‍ठ एमएलए केजी बोपैया को अस्थायी विधानसभा अध्यक्ष नियुक्त कर दिया. इस पर कांग्रेस फिर कोर्ट गई. हालांकि कोर्ट ने कहा कि वह प्रोटेम स्‍पीकर की नियुक्ति पर कोई आदेश पारित नहीं करेगी.

अगर कांग्रेस चाहती है तो नोटिस जारी किया जा सकता है लेकिन इससे शक्ति परीक्षण टल जाएगा. इस बीच बीजेपी के वकील ने शक्ति परीक्षण लाइव कराने की बात कह दी. इस बात को कांग्रेस ने पकड़ लिया और राजी हो गई. कोर्ट ने भी यह आदेश पारित कर दिया.


4- सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद कर्नाटक में. कांग्रेस के दो विधायक सुबह विधानसभा की कार्यवाही शुरू होने पर वहां नहीं पहुंचे थे. कई कांग्रेसी नेताओं ने दोनों विधायकों के बीजेपी द्वारा अगवा करने की बात कही. हालांकि बाद में दोनों को कड़ी सुरक्षा में विधानसभा लाया गया. इससे उस आशंका को विराम लग गया कि ये दोनों विधायक बीजेपी के साथ गए हैं.


5- शक्ति परीक्षण से पहले चुनाव जीते दोनों निर्दलीय विधायकों के बारे में भी लग रहा था कि वे बीजेपी के साथ जा सकते हैं. हालांकि ऐसा नहीं हुआ. साथ ही कांग्रेस और जेडी(एस) के भी किसी विधायक के न टूटने पर जब यह कंफर्म हो गया कि येदियुरप्‍पा विश्‍वास मत हार जाएंगे तो दिल्‍ली से यह सुझाव आया कि मुख्‍यमंत्री को इस्‍तीफा दे देना चाहिए. उसके बाद फिर तीसरी बार भी येदियुरप्पा बिना अपना कार्यकाल पूरा किये ही इस्तीफा राज्यपाल को सौंप दिया

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