इस परिवार से निकल चुके हैं राष्ट्रीय स्तर के 14 फुटबॉलर

भोपाल। आज हम आपको ऐसी जानकारी देने जा रहे हैं जिसे पढ़कर आप हैरान हो जाएंगे. अब जबकि फीफा विश्व कप के शुरु होने में चंद दिन शेष है, ऐसे में राजधानी में एक परिवार ऐसा भी है, जिसके लिए फुटबॉल सिर्फ एक खेल नहीं, बल्कि धर्म है. इस परिवार के 14 सदस्य नेशनल और स्टेट चैंपियनशिप में प्रदेश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. आज इसी खेल से पूरे परिवार को राजधानी में पहचाना जाता है.

सिंह परिवार के मुखिया जेपी सिंह ने ही सबसे पहले फुटबॉल खेलना शुरू किया था, इसके बाद दोनों भाई आए और फिर परिवार के सभी लड़के और लड़कियों ने फुटबॉल को ही चुना है. जेपी सिंह 1980 से सक्रिय हैं, पहले खिलाड़ी थे, बाद में कोच व रेफरी की भूमिका निभा रहे हैं और राजधानी में फुटबॉल की नई पौध को तैयार कर रहे हैं.

जेपी सिंह ने बताया कि फीफा विश्व कप के दौरान अधिकांश सदस्य साथ में ही मुकाबले देखते हैं और अपनी-अपनी टीम का समर्थन करते है. उन्होंने बताया कि परिवार की संख्या बढ़ती जा रही है, व्यस्तता के चलते अब सभी का एक साथ मिलना मुश्किल होता है. परिवारिक समारोह में ही सभी मिल पाते हैं, इसके अलावा सिर्फ फीफा वर्ल्ड कप ही है, जिसमें हम सभी सदस्य एक साथ शामिल हो पाते हैं. इसीलिए सभी को फीफा वर्ल्ड कप का इंतजार रहता है.

परिवार की तरफ से फुटबाल खेलने वाले सदस्य

जेपी सिंह, सुनील सिंह, देवेन्द्र प्रताप सिंह, विक्रम प्रताप सिंह, गजेन्द्र प्रताप सिंह, भूपेन्द्र सिंह, सत्येन्द्र सिंह, शुभम सिंह, शालिनी सिंह, सौरभ सिंह, गौरव सिंह, कुमकुम सिंह, तनिश सिंह व पंकज सिंह.

जेपी सिंह को इस उपलब्धि के लिए ढेरों सम्मान भी प्राप्त हो चुके हैं. आज भी वे उतने ही सक्रिय हैं और तात्या टोपे स्टेडियम में कोचिंग दे रहे हैं. भोपाल रेफरी कमेटी के हैड रेफरी के अलावा वे स्टूडेंट क्लब के सचिव और जिला फुटबॉल संघ के कार्यकारी अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी निभा रहे हैं. परिवार के सभी सदस्य अलग-अलग उम्र के हैं इसलिए पसंद भी सबकी अलग-अलग है. वैसे सभी खिलाड़ियों को पसंद करते हैं, नेमार के कारण ब्राजील, मैसी के कारण अर्जेंटीना और रोनाल्डो के कारण पुर्तगाल. इसके अलावा जर्मनी और इंग्लैंड के भी प्रशंसक हैं।

जेपी सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी में वह पहलवान थे, लेकिन हाथ टूटने के बाद उन्हें कुश्ती को छोड़ना पड़ा. फुटबॉल के कारण ही उन्हें टेक्सटाइल मिल में नौकरी मिली. उन्होंने राजेंद्र नगर स्थित मैदान पर ही स्टूडेंट क्लब स्थापित किया और भोपाल की फुटबॉल को एक नई दिशा दी.

 

 

 

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