लखनऊ यूनिवर्सिटी में फिर गरमाया छात्रसंघ बहाली का मुद्दा, आखिरी बार साल 2005 में हुए थे चुनाव

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में राज्यपाल बदलते ही एक बार फिर लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ बहाली का मुद्दा गरमा गया है. इसे लेकर छात्र संगठनों के अलावा अब शिक्षक संघ भी इसमें कूद पड़ा है. लखनऊ विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (लूटा) व शारीरिक शिक्षा विभाग के प्रोफेसर डॉ. नीरज जैन ने कहा कि लविवि में छात्रसंघ चुनाव इसलिए नहीं हो रहे हैं, क्योंकि विश्वविद्यालय प्रशासन नहीं चाहता है कि यहां छात्र-राजनीति नर्सरी फले फूले. उन्हें डर है कि छात्रसंघ के लोग भ्रष्टाचार को मुद्दा बनाकर बवाल कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि पड़ोसी जिलों के विश्वविद्यालयों में हालांकि चुनाव में हो रहे हैं.

विश्वविद्यालय प्रशासन के कुछ अधिकारियों का मानना है कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और अनुशासन बनाए रखने के लिए छात्रसंघ चुनाव बंद कर दिया जाना चाहिए. चुनाव के बहाने विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक दलों का दखल बढ़ता है और पढ़ाई-लिखाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है.

लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव को राजनीति की नर्सरी माना जाता था. यहां युवा राजनीति के दांवपेच सीखकर भविष्य की राजनीति में बड़े मुकाम पर पहुंचते हैं. इस नर्सरी से निकले तमाम ऐसे नौजवान नेता हैं, जो आगे राजनीति का वटवृक्ष बने. इनमें पूर्व राष्ट्रपति डॉ. शंकर दयाल शर्मा, पूर्व प्रधानमंत्री वी.पी. सिंह, पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर समेत कई नाम हैं.

समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता अखिलेश यादव छात्रसंघ चुनावों की बहाली का वादा करके सरकार में आए. लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों में कुछ मुद्दों को मानने से छात्रों ने इनकार कर दिया, जिसमें आयु सीमा का मुद्दा भी था. साल 2012 में लखनऊ विश्वविद्यालय प्रशासन ने लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों का हवाला देकर उम्मीदवार हेमंत सिंह को चुनाव लड़ने से रोक दिया. हेमंत सिंह ने अदालत दरवाजा खटखटाया. इसके बाद छात्रसंघ चुनाव पर फिर से रोक लग गई.

Leave a comment