रेलवे की कार्रवाई का हुआ असर मिनटों में खत्म होने वाले तत्काल टिकट अब घंटों तक हो रहे बुक

आरपीएफ ने अवैध सॉफ्टवेयरों से टिकटों की कालाबाजारी करने वालों पर शिकंजा कसा, तो रेलवे ने अपने सिस्टम की सफाई करते हुए इन सॉफ्टवेयरों को निकाल बाहर किया। रेलवे का दावा है कि इसके नतीजतन पहले विंडो खुलते ही मिनटों में गायब हो जाने वाले तत्काल टिकट अब आईआरसीटीसी की वेबसाइट पर घंटों तक भी बुक हो रहे हैं।रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) के महानिदेशक अरुण कुमार ने मंगलवार को कहा कि अवैध सॉफ्टवेयरों का उपयोग करने वाले 60 एजेंटों की गिरफ्तारी की गई है। इस कार्रवाई का असर दिखाई देने लगा है। कुमार ने बताया कि रेलवे ने अपने सिस्टम में सेंध लगाने वाले अवैध एएनएमएस, मैक और जगुआर सॉफ्टवेयरों का उपयोग प्रतिबंधित कर दिया है।उन्होंने कहा कि इनसे टिकट बुक करते समय आईआरसीटीसी वेबसाइट पर लॉग-इन कैप्चा, वेरिफिकेशन कैप्चा और बैंक ओटीपी की जरूरत को बाईपास कर दिया जाता था। टिकट सच में तत्काल बुक हो रहे थे। वहीं इसका खामियाजा आम यूजर्स भुगत रहे थे, जो सारी प्रक्रियाएं पूरी करने के बाद भी टिकट नहीं बनवा पा रहे थे।एक यूजर को आईआरसीटीसी वेबसाइट पर टिकट बुक करने में औसतन 2.55 मिनट लगते हैं। गैरकानूनी सॉफ्टवेयर से एजेंट औसतन 1.48 सेकंड में टिकट बना रहे थे। रेलवे ने बताया कि पिछले दो महीने से उसने एजेंटों द्वारा तत्काल टिकट बुकिंग पर रोक लगाई है।यात्रा से 24 घंटे पहले सुबह 10 एसी व 11 बजे स्लीपर के तत्काल टिकट आईआरसीटीसी पर बुक होते हैं, लेकिन शिकायत बनी हुई थी कि कि यह बुकिंग बहुत मुश्किल से होती है। चंद मिनट में सीटें खत्म हो जाती हैं। रेलवे की ताजा कार्रवाई के बाद इसमें कुछ सुधार आया है। 26 अक्तूबर 2019 को मगध एक्सप्रेस में तत्काल टिकट दो मिनट में खत्म हो गए थे, नौ फरवरी को यह 10 घंटे बाद भी उपलब्ध थे। संपूर्ण क्रांति एक्सप्रेस का 16 नवंबर 2019 को तत्काल कोटा तीन मिनट में खत्म हुआ, आठ फरवरी को यह एक घंटे बाद तक उपलब्ध था।

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