छोटे और मझोले कारोबारी भी ई-इन्वॉयसिंग से बिजनेस करना बना सकते हैं आसान

नई दिल्‍ली,  पिछले कुछ वर्षों से भारत में रजिस्टर्ड छोटे और मझले कारोबारियों (एसएमबी) की संख्या में काफी बढ़ोत्‍तरी देखी गई है। यह संख्या 50 लाख से बढ़कर अब 1 करोड़ तक हो गई है और दिन ब दिन बढ़ती ही जा रही है। लघु और मध्यम कारोबार को पूरी तरह ऑटोमेशन की प्रक्रिया में ढालना कोई आसान काम नहीं है, लेकिन ई-इन्वॉयसिंग के माध्यम से कई समस्याओं का समाधान किया जा सकता है। हर बार सामान की खरीद और बिक्री के समय बिल बनाया जाता है। यह भुगतान की प्रक्रिया में पहला कदम है। इन्वॉयस बनाना किसी भी कारोबार के लिए सबसे जरूरी कार्यों में से एक हैं। यह भुगतान प्रक्रिया में पहला कदम है। उसी समय इन्वॉयस बनाना मानवीय तौर पर काफी कठिन हो सकता है, जिसमें काफी ग़लतियां भी हो सकती हैं। लेकिन ई-इन्वॉयसिंग प्रक्रिया छोटे कारोबार में संचालन की लागत घटाने में मदद कर सकती हैं, कंपनियों के लिए तेजी से पेमेंट करना आसान बना सकती है और उनके लिए फाइनेंस के नए विकल्प खोल सकती है।

ई-इन्वॉयस को संगठित डिजिटल फॉर्मेट का प्रयोग करते हुए विक्रेताओं और खरीदारों के बीच सामान के आदान-प्रदान और भुगतान के अनुरोध की प्रोसेसिंग को स्वचालित ढंग से होने वाली प्रक्रिया के रूप में परिभाषित किया जा सकता है। अब इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस के आने के बाद वर्ड या एक्सेल स्प्रेडशीट पर अलग-अलग इन्वॉयस की सीरीज बनाने की जरूरत नहीं है। पहले इस के लिए मानवीय दखल की जरूरत पड़ती थी और इसे अपडेट करना होता था। इलेक्ट्रॉनिक इन्वॉयस से अब यह प्रक्रिया काफी तेज और आसान हो सकती है। 

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