24 जनवरी को शनि का राशि परिवर्तन: काले क्यों हैं शनि देव

30 वर्षों के बाद शनि एक बार फिर अपनी स्वयं का राशि मकर में आ रहे हैं। 24 जनवरी को शनिदेव धनु राशि को छोड़कर मकर राशि में प्रवेश करेंगे। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को न्यायाधीश माना गया है। शनि अच्छे कर्म करने वालों के अच्छा परिणाम और बुरे कर्म करने वालों को अशुभ फल देते हैं। शनि के राशि परिवर्तन के मौके पर आइए जानते हैं शनि से जुड़ी खास बातें।

  • शनिदेव काले क्यों:  शनिदेव के पिता का नाम सूर्यदेव और माता का नाम छाया है। छाया भगवान शिव की बहुत बड़ी भक्त थीं। माता छाया शिवजी की तपस्या में इतनी लीन रहती थीं कि उनको गर्भ में पल रहें शनि की चिंता नहीं रहती। इस कारण से ना तो वह खुद अपना और ना ही गर्भ में पल रहे अपने बच्चे का ध्यान रख पाती। जिसके कारण से शनिदेव काले और कुपोषित पैदा हुए।
  • बच्चों पर क्यों नहीं पड़ती शनि छाया:  12 साल तक के बच्चों पर शनि का प्रकोप कभी नहीं रहता है। इसके पीछे पिप्पलाद और शनि के बीच हुए युद्ध का प्रसंग है। पिप्पलाद ने युद्ध में शनि को परास्त कर दिया और इस शर्त पर छोड़ा कि वे 12 वर्ष तक की आयु के बच्चों को किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं देंगे। तब से शनिदेव बच्चों पर अपनी छाया नहीं डालते।
  • शनिदेव लंगड़े क्यों:  भगवान शनि के धीमी चाल और लंगड़ा कर चलने के पीछे पिप्पलाद मुनि के कोप का ही कारण है। पिप्लाद मुनि अपने पिता की मृत्यु का कारण शनिदेव को मानते थे। पिप्पलाद मुनि ने शनि पर ब्रह्रादण्ड से प्रहार किया। शनि यह प्रहार सहन करने में असमर्थ थे। जिस कारण से शनि तीनों लोकों में दौड़ने लगे। इसके बाद ब्रह्रादण्ड ने उन्हें लंगड़ा कर दिया।
  •  भगवान शिव ने शनि को नियुक्ति किया दण्डाधिकारी:  एक बार शनिदेव और भगवान शिव के बीच युद्ध भी हुआ। भयानक युद्ध के बाद भगवान शिव ने शनि को परास्त कर दिया था। बाद में सूर्यदेव की प्रार्थना पर भगवान शिव ने उन्हें माफ किया। शनि के रण कौशल से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपना सेवक और दण्डाधिकारी नियुक्ति कर लिया। इनकी दृष्टि से मनुष्य क्या देवता भी भयभीत रहते हैं।

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