पुलवामा आतंकी हमला : चीन का फिर दिखा असली चेहरा

बीजिंग: जम्मु-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले के प्रति चीन ने गहरी संवेदना तो व्यक्ति की लेकिन अगले ही पल अपना असली चेहरा दिखा दिया। भारत पर ये आतंकी हमला करने की ज़िम्मेदारी पाकिस्तानी स्थित जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। इसका प्रमुख मसूद अजहर है जिसे भारत लंबे समय से अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाने की कोशिश करता रहा है। इसी आतंकी हमले के बाद भारत ने इससे जुड़ा एक और प्रयास किया लेकिन चीन ने एक बार फिर इस पर पानी फेर दिया। ये तीसरा मौका है जब चीन ने जैश के प्रमुख मसूद को बचाने के लिए ज़ोर लगाया है। इसके पहले भी 2016 और 2017 में चीन ने जैश को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित करवाए जाने के ख़िलाफ अपने वीटो का इस्तेमाल किया था। आपको बता दें कि आतंकी संगठन जैश ने इस बार सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया जिसमें 40 जवान शहीद हो गए। जैश के आतंकी आदिल अहमद ने बारूद से भरी एक गाड़ी को सीआरपीएफ के काफिले की गाड़ी से टकरा दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गेंग शुआंग ने पत्रकारों से कहा, चीन आत्मघाती हमले की खबरों से वाकिफ है। हम इस हमले से गहरे सदमे में हैं और मृतकों तथा घायलों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना और सहानुभूति व्यक्त करते हैं।

गेंग ने कहा, हम आतंकवाद के किसी भी रूप की कड़ी निंदा और पुरजोर विरोध करते हैं। उम्मीद है कि संबंधित क्षेत्रीय देश आतंकवाद से निपटने के लिये एक दूसरे का सहयोग करेंगे और इस क्षेत्र में शांति और स्थायित्व के लिये मिलकर काम करेंगे। अजहर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कराने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, जहां तक सूचीबद्ध करने की बात हैं, मैं बस यही बता सकता हूं कि सुरक्षा परिषद की 1267 समिति के आतंकवादी संगठनों को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया और नियम स्पष्ट हैं। अजहर को वैश्विक आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी सदस्य देशों से भारत की अपील के बारे में उन्होंने कहा, जैश-ए-मोहम्मद को सुरक्षा परिषद की आतंकवाद प्रतिबंध सूची में रखा गया है। चीन संबंधित प्रतिबंधों के मुद्दे से रचनात्मक और जिम्मेदार तरीके से निबटना जारी रखेगा। पाकिस्तान के करीबी और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वीटो शक्ति प्राप्त चीन अजहर को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी के रूप में सूचीबद्ध करने की भारत की कोशिशों को कई बार विफल कर चुका है। उसका कहना है कि इस मुद्दे को लेकर सुरक्षा परिषद में कोई सहमति नहीं है।

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