सत्ता की भूख, राजनीति की उठा पटक, पर्दे पर कई बार दिखा कुर्सी पाने का खेल

इस समय राजस्थान में जो सियासी ड्रामा हुआ, उसकी वजह से लोगों को वाद विवाद करने का एक और बेहतरीन मौका मिल गया है. बहस तेज हो गई है कि राजस्थान में गहलोत की कांग्रेस सरकार बचेगी या फिर सचिन पायलट की देखने मिलेगी नई उड़ान. हालांकि फाइनल में सचिन पायलट को कांग्रेस पार्टी से हटा दिया गया. इस पूरे मुद्दे ने काफी लाइमलाइट बटोरी. लेकिन राजनीति से बॉलीवुड भी अछूता नहीं रहा है.

कई ऐसी फिल्में देखने को मिली है जहां राजनीतिक गलियारों की उन कहानियों को दिखाया गया है जो शायद वैसे लोगों तक नहीं पहुंच पाती. आइए ऐसी ही कुछ फिल्मों के बारे में जानते हैं-

नायक

फिल्म में अनिल कपूर को बतौर 24 घंटे के लिए सीएम बनता देखना सभी को खूब पसंद आता है. लेकिन इसके अलावा फिल्म में एक और पहलू पर जोर दिया जाता है. फिल्म में दिखाया जाता है कि कैसे शिवाजी को रोकने के लिए प्रदेश का मुख्यमंत्री अलग-अलग साजिश रचता है. कैसे अपनी कुर्सी बचाने के लिए अलग-अलग हथकंडे अपनाए जाते हैं. नायक के जरिए दो तरह की राजनीति दिखाने की कोशिश रही. एक तो वो राजनीति जो देश में अभी देखने को मिलती है, वहीं दूसरी वो जो शिवानी ने दिखाई थी, जहां सिर्फ और सिर्फ जनता की सेवा उदेश्य होता है.

 

राजनीति

जिस फिल्म का नाम ही राजनीति हो, उस फिल्म में इतनी राजनीति देखने को मिलती है जिसका कोई हिसाब नहीं. कैसे सरकार बनाई जाती है, कैसे चुनाव जीता जाता है, क्या-क्या हथकंडे अपनाए जाते हैं, फिल्म राजनीति में ये सब देखने को मिलता है. किसी की निजी महत्वकांक्षा कैसे सत्ता परिवर्तन कर सकती है, राजनीति में इस पहलू को भी खूबसूरती से दिखाया गया है. फिल्म में रणबीर कपूर, अजय देवगन, नाना पाटेकर, मनोज बाजपेयी, कटरीना कैफ जैसे सितारों ने अहम रोल निभाया था.

सरकार

राम गोपाल वर्मा की फिल्म सरकार भी राजनीति के एक पहलू को काफी नजदीकी से दिखाती है. फिल्म में दिखाया गया है कि राजनीतिक हत्या किसे कहते हैं. राजनीति में ऐसी घटनाएं क्यों होती हैं. सरकार के जरिए फिल्म में ये भी दिखाया गया है कि कैसे अंडरवर्ल्ड भी कई बार राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाता है. फिल्म में अमिताभ बच्चन का किरदार कभी न्याय के लिए अपने गुंडों से किसी को पिटवा देता है तो कभी जेल भी जाने को तैयार रहता है. इस फिल्म को काफी पसंद किया जाता है.

ठाकरे

शिवसेना के बड़े और वरिष्ठ नेता बाला साहेब ठाकरे की जिंदगी पर भी फिल्म बनाई गई है. फिल्म में नवाज ने उनका रोल प्ले किया है. ये एक विशुद्ध राजनीति फिल्म हैं जहां दिखाया जाता है कि कैसे महाराष्ट्र में शिवसेना अपनी ताकत और सोच का विस्तार करती है. कैसे बाला साहेब ठाकरे का सिक्का पूरी मुंबई में चल पड़ता है. फिल्म को देख राजनीति से जुड़ी कई चीजें देखने का मौका मिलता है.

द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर

ठाकरे की ही तरह द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर को भी एक बॉयोपिक के तौर पर बनाया गया है. फिल्म को संजय बारू की किताब द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर से प्रेरित होकर बनाया गया है. फिल्म में मनमोहन सिंह की बतौर प्रधानमंत्री जर्नी दिखाई गई है. फिल्म में दिखाया गया है कि कैसे राजनीति में कई बार पॉवर के अलग-अलग केंद्र होते हैं. कैसे कई बार निजी महत्वाकांक्षाएं किसी पार्टी या उस सरकार को मुसीबत में फंसा देती है. फिल्म के तथ्यों पर जरूर सवाल खड़े किए गए हैं, लेकिन इस बात में कोई दो राय नहीं कि देश की राजनीति का ये भी एक पहलू है.

धड़क

अब कहने को धड़क एक रोमांटिक फिल्म थी, लेकिन इस फिल्म में राजनीति का वो पहलू दिखाया गया था जो काफी आम है. अपने फायदे के लिए किसी दूसरे को फंसाना, सत्ता में बने रहने के लिए कैमरे के पीछे गलत करना और सामने खुद को शरीफ दिखाना, धड़क में ये सब देखने को मिलता है. फिल्म में आशुतोष एक नेता बने हैं जो चुनाव भी जीतना चाहते हैं और अपनी बेटी की शादी किसी ऊंचे घराने से भी कराना चाहते हैं. ऐसे में जब उनकी बेटी किसी दूसरे शख्स से प्यार करने लगती है, तब कैसे चुनाव को देखते हुए वो अपनी रणनीति बदलते हैं और चुनाव जीतने के बाद क्या-क्या करते हैं,फिल्म ये सब देखने को मिलता है.

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