सियासत ने बदली करवट : सपा-बसपा ने दी 15 सीटें, कांग्रेस ने बढ़ाई डिमांड

कांग्रेस सूबे में कम से कम 25 संसदीय सीट चाहती हैं

नई दिल्ली : लोकसभा चुनाव 2019 में नरेंद्र मोदी के विजय रथ को उत्तर प्रदेश में रोकने के लिए SP और BSP ने कांग्रेस को दरकिनार करते हुए गठबंधन का ऐलान किया था। इसके बाद प्रियंका गांधी के रूप में कांग्रेस ने बड़ा दांव चला और उन्हें पार्टी का महासचिव बनाते हुए पूर्वांचल की जिम्मेदारी सौंपी, जिसके बाद से सूबे की सियासत तेजी से करवट बदल रही है। इसी का नतीजा है कि अब सपा-बसपा समझौते के मूड में नजर आ रही हैं और कांग्रेस को गठबंधन का हिस्सा बनाना चाहती हैं। सूत्रों की मानें तो सपा-बसपा ने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में से कांग्रेस को 15 सीटों का ऑफर दे दिया है, लेकिन अब पार्टी ने सीटों की डिमांड बढ़ा दी है। कांग्रेस सूबे में कम से कम 25 संसदीय सीट चाहती है। कांग्रेस नेताओं की मानें तो वह सूबे में सपा-बसपा के बराबर ही सीटें चाहती है।

इस तरह से उनके लिहाज से तीनों पार्टियां 25-25 सीटों पर चुनाव लड़ें और बाकी बची पांच सीटें आरएलडी जैसी छोटे सहयोगी दलों के लिए रखा जाए। बता दें कि पिछले महीने अखिलेश यादव और मायावती ने सपा-बसपा गठबंधन का ऐलान किया था। इस दौरान उन्होंने सूबे की 80 लोकसभा सीटों में 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला किया था। इसके अलावा दो सीटें गठबंधन की अन्य पार्टियों के लिए छोड़ने का फैसला किया था। वहीं, अमेठी-रायबरेली में कांग्रेस के खिलाफ उम्मीदवार नहीं उतारने का फैसला किया था। हालांकि एक महीने गुजर जाने के बाद सपा-बसपा सूबे की किन सीटों पर चुनाव लड़ेंगी। इसकी घोषणा अभी तक नहीं की है। दरअसल इसके पीछे प्रियंका गांधी की राजनीतिक एंट्री मानी जा रही है। पिछले दिनों खबर आई थी कि सपा-बसपा नए तरीके से राजनीतिक रणनीति बनाएंगे। इसके बाद वो सीटों की बंटवारा करेंगे।

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