गुलाबी ठंड के संग बदलने लगे सियासत के रंग!

नए किरदार आते जा रहे हैं,
मगर नाटक पुराना चल रहा है।

-शोएब गाज़ी

राहत इंदौरी की यह शायरी आज की तुच्छ राजनीत पर बिल्कुल फिट बैठती है। अलग-अलग किरदारों में झूठी दफली की आवाज सुबह के भोर को चीरते हुए गुलाबी ठंड से गुजर रही है। बड़ी-बड़ी गा​ड़ियां धीरे-धीरे दरवाजे पर दस्तक देने लगी हैं। पता 2019 का बताकर अच्छे दिन के परिचय की रेवड़ी बांटी जा रही है। कुछ अच्छे दिन का परिचय सुनकर दरवाजा बंद कर ले रहे हैं, तो कुछ दरवाजा खोलकर अच्छे दिन के मेहमानों का स्वागत पान पराग से कर रहे हैं।

सजते मंच और दौड़ती गाड़ियों की हुंकार ने धराशाही बनी जनता को एक बार फिर गुदगुदाने में लगी है। साथ अपने-अपने पाले में लाने की अटकले भी सहेजी जा रही हैं।भले ही ठंड ने दस्तक दे दी हो पर शब्दों के बाज़ार की गर्माहट ने एक फिर से राजनेताओँ की जवानी का खुमार जून वाले महीने की तरह चढ़ने लगा है। चाय की दुकानों पर लगते सदन में सियासी समीकरण की तीव्रता चाय की केतली से निकलती भाप से भी तेज लगने लगी है। हर बार से अलग इस बार का चुनाव बहुत ही दिलचस्प और इतिहास गढ़ने वाला होगा।

दरअसल, इस बार के चुनावी जंग में राजनेता अपने—अपने भगवानों के साथ मैदान में उतरने की फिराक में हैं। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने कहा कि अगर मैं सत्ता में दुबारा आता हूं तो भगवान विष्णु का भव्य मंदिर बनाउंगा। तो दूसरी तरफ कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी कहां पाछे रहने वाले! वे 2019 की चुनावी नैय्या पार करने के लिए कैलाश मानसरोवर पहुंच गये, जहां भगवान शिव का भव्य मंदिर है। वहां राहुल गांधी ने पूजा-अराधना की, तिलक लगाया। तो वहीं भाजपा की बात करें तो इन सारे खेल में भाजपा भी पीछे नहीं, बल्कि दो कदम आगे चल रही है। भाजपा का नाम लें और राम की बात न करें तो बेमानी होगी क्योंकि भाजपा लगभग 25 वर्षों से राम का का सहारा लेकर सियासी मैदान अच्छी खासी भूमिका बनाने में कामयाब रही है और जब एक बार फिर से चुनावी सीजन आया तो सबने अपने-अपने राम को तलाश लिया है।

काश! धराशायी बनी जनता यह जान लेती कि सियासत में कोई मां-बाप नहीं होता तो राजनेताओं के मुद्दे से भटकते ही गली-चौराहों से होते हुए हर तबके से विरोध का बिगुल बज जाता, लेकिन अफसोस ऐसा कुछ नहीं हुआ। चुनाव आता गया, सत्ता बदलती गई, अगर कुछ नहीं बदला तो है वह जनता के हालात जो जस के तस बने रहे और आती-जाती सरकारें जनता का हितैषी बनकर लूटती रही हैं।

 

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