गरीबी में पाकिस्तान ने चीन को भी दिया झटका, उठाया ये कदम

आर्थिक तंगहाली का सामना कर रहे पाकिस्तान ने चीन को भी झटका दे दिया है. पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) सरकार ने अगले वित्तीय वर्ष के लिए सभी विकास कार्यों को रोक दिया है और चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) पर भी मौद्रिक सख्ती की कैंची चला दी है.

जियो न्यूज के मुताबिक, अर्थव्यवस्था की सुस्त रफ्तार के बावजूद मंगलवार को पेश हुए बजट में चीन-पाकिस्तान इकनॉमिक कॉरिडोर यानी सीपीईसी की परियोजनाओं के लिए आवंटित धनराशि में करीब 44 फीसदी की कटौती कर दी है.

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2019-20 सीपीईसी परियोजनाओं में 110 अरब रुपए आवंटित किए हैं जबकि वित्तीय वर्ष 2018-19 में चीन समर्थित सार्वजनिक विकास कार्यक्रम (PSDP) के तहत परियोजनाओं में 198 अरब रुपए खर्च किए गए थे. पाकिस्तान की सरकार ने सतत विकास कार्यक्रमों के लिए सांसद निधि में करीब 24 अरब रुपए आवंटित किए हैं. 

विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान में पाकिस्तान की सरकार सीपीईसी को अपनी प्राथमिकता में नहीं रखना चाहती है. पाकिस्तान की सरकार ने इस बार बहुत ही अनुशासित बजट पेश किया है और तमाम खर्चों में कटौती कर दी है. इसके अलावा, पाकिस्तानी जनता पर भारी-भरकम टैक्स भी लगा दिए गए हैं.

पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ का सीपीईसी के बारे में संदेह पहले भी नजर आ चुका है. कैबिनेट सदस्य रज्जाक दाऊद ने सीपीईसी परियोजनाओं पर एक साल तक किनारा कर लेने की बात कही थी क्योंकि उनका दावा था कि इससे पाकिस्तान को बहुत कम फायदा पहुंचने वाला है.

इससे पहले भी पाकिस्तान की सरकार सीपीईसी परियोजनाओं से पैसे बाहर निकाल चुकी है. इस्लामाबाद के पब्लिक पॉलिसी विश्लेषक हसन ख्वार कहते हैं, "पाकिस्तान सरकार आर्थिक संकट की वजह से इस तरह का कदम उठाने को मजूबर हुई और इसे सीपीईसी से दूर जाने के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. सरकार हर तरफ कटौती कर पैसे जुटाने की कोशिश कर रही है."

 

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