निर्भया के दोषियों को कल सुबह होनी है फांसी, आज कोर्ट से मिलेगी राहत?

निर्भया के एक दोषी पवन कुमार ने फांसी से तीन दिन पहले यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की. इस याचिका पर आज सुनवाई होगी.

  • पवन ने दाखिल की क्यूरेटिव पिटीशन
  • सुप्रीम कोर्ट आज करेगा सुनवाई
  • डेथ वारंट पर रोक की भी मांग

निर्भया के गुनहगारों को कल सुबह फांसी होगी या नहीं? इस पर आज सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट अपना फैसला सुनाएगा. दरअसल, निर्भया के एक दोषी पवन कुमार ने फांसी से तीन दिन पहले यानी शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की और मौत की सजा को उम्रकैद में बदलने की मांग की.

इसके साथ ही चारों दोषियों की शारीरिक और मानसिक स्थिति जानने के लिए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) को निर्देश देने की मांग को लेकर शनिवार को दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की गई. इस पर भी आज सुनवाई हो सकती है. इसके अलावा फांसी पर स्टे की मांग वाली अर्जी पर भी सुनवाई होगी.

फांसी पर स्टे की अर्जी पर होगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाई कोर्ट के अलावा आज पटियाला हाउस कोर्ट में भी निर्भया के दोषियों की अर्जी पर सुनवाई होगी. दरअसल, निर्भया के दोषी अक्षय और पवन ने कोर्ट में भी अर्जी लगाई, जिसमें डेथ वारंट पर रोक की मांग की गई है. कोर्ट में निर्भया के दोषी पवन ने दलील दी कि उसने सुप्रीम कोर्ट में क्यूरेटिव पिटीशन लगाई है. लिहाजा उसकी फांसी की सजा पर रोक लगाई जाए. थोड़ी देर में पटियाला हाउस कोर्ट फांसी पर स्टे की अर्जी पर सुनवाई करने जा रहा है.

पांच जजों की बेंच करेगी सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई जस्टिस एन. वी. रमन्ना की अगुवाई में जस्टिस अरुण मिश्रा, जस्टिस नरीमन, जस्टिस भानुमति और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच चैंबर में करेगी. इससे पहले सुप्रीम कोर्ट निर्भया के तीन दोषियों यानी अक्षय, विनय और मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज कर चुका है.

7 साल 3 महीने से इंसाफ का इंतजार

सुनवाई से पहले निर्भया की मां ने कहा कि मैं 7 साल 3 महीने से संघर्ष कर रही हूं।वो कहते हैं हमें माफ कर दो। कोई कहता है कि मेरे पति,बच्चे की क्या गलती है।मैं कहती हूं कि मेरी बच्ची की क्या गलती थी?

फैसले में गलतियों की दलील

निर्भया के दोषी पवन कुमार के वकील एपी सिंह ने कहा कि अपराध के समय वह किशोर था और मौत की सजा उसे नहीं दी जानी चाहिए. पहले के फैसलों में कई गलतियां रही हैं और उन्हें उम्मीद है कि इन गलतियों को इस क्यूरेटिव याचिका के माध्यम से संशोधित किया जाएगा.

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