भारत ने 'वॉन्टेड' जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण के लिए मलेशिया से किया अनुरोध

भारत ने कट्टरपंथी इस्लामिक स्कॉलर जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण के लिए मलेशिया से अनुरोध किया है. जाकिर नाईक भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और भड़काउ भाषण देने के लिए वॉन्टेड है.

जाकिर नाईक लगभग दो साल से भारतीय कानून से बचने के लिए मलेशिया में रह रहा है. बांग्लादेश में 2016 में हुए एक आतंकी हमले के बाद उसके खिलाफ यहां दाखिल किए गए मामलों के बाद से वह फरार है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा, "भारत सरकार ने डॉ. जाकिर नाईक के प्रत्यर्पण के लिए अनुरोध किया है. हम मलेशिया के साथ इस मामले पर लगातार कोशिश करते रहेंगे." रवीश कुमार ने कहा कि कई देशों के साथ भारत की प्रत्यर्पण व्यवस्था है और अतीत में कई मामलों में भारत ने प्रत्यर्पण में कामयाबी पाई है. कुमार ने कहा, "भारतीय न्याय प्रणाली की ईमानदारी पर कभी सवाल नहीं उठा है."

जाकिर नाईक ने दो दिन पहले कहा था कि वह भारत लौटने के लिए तैयार है बशर्ते सुप्रीम कोर्ट उसे लिखित में यह कहे कि जब तक वह वास्तव में दोषी नहीं ठहराया जाता, तब तक उसे गिरफ्तार नहीं किया जाएगा. एक बयान में भगोड़े इस्लामिक स्कॉलर ने कहा कि उसे भारतीय न्यायपालिका पर भरोसा है लेकिन मुकदमे पर भरोसा नहीं है. नाईक ने जोर देकर कहा, "आरोपों और शिकायतों के बावजूद, भारत या दुनिया में कहीं भी किसी भी अदालत में मेरे खिलाफ एक भी फैसला नहीं आया है."

जाकिर नाईक ने कहा, "भारत के हालिया इतिहास से पता चलता है कि अदालत की ओर से निर्दोष घोषित किए जाने से पहले वहां गिरफ्तार किए गए मुसलमानों को 8 से 20 सालों तक जेलों में रहना पड़ता है." नाईक ने कहा, "भारतीय एजेंसियों के इस रिकॉर्ड को देखते हुए मैं अपने जीवन और अपने अधूरे काम को बर्बाद नहीं करना चाहता हूं." वह खुद से संबंधित नवीनतम घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया दे रहा था, जहां प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) नाईक की गिरफ्तारी को लेकर मुंबई की एक अदालत में उसके खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी करने की प्रक्रिया शुरू करने जा रहा है. ईडी ने नाईक पर 193 करोड़ रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया है.

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