झुकता है चीन झुकाने वाला चाहिए by MADHUR DARBARI

एशिया में  भारत-चीन दो महाशक्तियां हैं, ये न केवल एशिया की वरन् विश्व की भी उभरती हुई महाशक्तियां हैं। पिछले चार-पांच महीनों से लद्दाख के क्षेत्र में दोनों देशों की सेनाएं एक-दूसरे के आमने-सामने तैनात हैं, सारा विश्व टकटकी लगाकर देख रहा है कि क्या इन दो महाशक्तियों के बीच परंपरागत युद्ध की संभावना बन सकती है। कई रक्षा विशेषज्ञ इस बात के कयास लगा रहे हैं कि वर्तमान स्थिति परंपरागत युद्ध का भी रूप ले सकती है क्या।

ऐसे में इस बात की विवेचना करना अतिआवश्यक है कि वास्तविक वस्तुस्थिति है क्या। दरअसल चीन, अमेरिका को अपना असली प्रतिस्पर्धी मानता है। चीन, अमेरिका में ट्रेड-वार इसी का जीता-जागता उदाहरण है। चीन, अमेरिका को हटाकर स्वयं सुपर पावर बनना चाहता है। चीन जानता है कि यदि भारत जैसी महाशक्ती से परंपरागत युद्ध में उलझेगा तो उसका मुख्य उद्देश्य धरा का धरा ही रह जाएगा। दोनों देश कई साल पीछे चले जाएंगे,तो परंपरागत युद्ध का तो सवाल ही नहीं उठता। 1962 की स्थिति 2020 से बिल्कुल अलग थी यह चीन भी जानता है। ऐसे में चीन की भारत को यह गीदड़भपकी ज़्यादा है, हकीकत बहुत ही कम। चीन भी भारत की सैन्य क्षमता से अच्छी तरह वाकिफ है, परन्तु भारत को हर स्थिति के लिए तैयार रहना चाहिए।

 

ब्लैक टाप हिल, हेलमेट हिल पर भारतीय कब्जे के बाद चीन बौखला गया है, ऐसे में हो सकता है कि मजबूरीवश चीन कोई छोटा-मोटा एक्शन ले, वरना चीन की विश्वस्तर पर बड़ी किरकिरी हो जाएगी और भारत आगे के क्षेत्रों पर भी कब्ज़ा कर सकता है।यदि चीन भारत से एक छोटा युद्ध लड़ता है तो उसमें भारत का पलड़ा ही भारी रहने वाला है। दरअसल, इस बार चीन अपने बिछाए जाल में खुद ही फंस गया है। अब ना तो चीन से उगलते ही बन रहा है और ना ही निगलते। शी जिनपिंग अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए छोटा-मोटा एक्शन ले सकता है लेकिन यह उसके लिए उल्टा भी पड़ सकता है ऐसे में शी जिनपिंग बहुत सोच समझकर ही निर्णय लेगा। कोरोना के कारण भी पूरा विश्व चीन के खिलाफ भारत के सपोर्ट में खड़ा है ।

चीन को समझना होगा कि भारत कोई छोटा-मोटा देश नहीं है, कि उसे और देशों की तरह गीदड़भपकियों से डराया-धमकाया जा सके। अमेरिका और यूरोप के देश तो यही चाहते हैं कि इन दोनों महाशक्तियां के बीच में युद्ध हो और दोनों की अर्थव्यवस्था चौपट हो जाए तथा दोनों देश कई साल पीछे चले जाएं। ऐसे में चीन को अपनी दादागिरी छोड़नी होगी।

दरअसल चीन अब जाड़े के मौसम का इंतज़ार कर रहा है, क्योंकि वो ऐसा समय होगा जब सेना को पीछे लिया जा सकता है ऐसे में चीन को एक बहाना भी मिल जाएगा पीछे हटने का और उसकी कुछ इज़्जत भी बच जाएगी। क्योंकि इस मामले में चीन की विश्वस्तर पर बहुत किरकिरी हो चुकी है। एक बात तो तय है इससे विश्वस्तर पर भारत की स्थिति और मजबूत हुई है तथा पूरा विश्व परिपेक्ष्य ही बदल गया है सब भारत की तरफ ही देख रहे हैं। भारत की रणनीति यही होनी चाहिए कि उसे आक्रामक स्थिति बनाये रखना चाहिए। इसीलिए तो कहते हैं, झुकता है चीन झुकाने वाला चाहिए।

 

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