कितनी थी धोनी की पहली कमाई? ट्रेन के टॉयलेट के पास सोकर किया था सफर

रांची के एक छोटे से परिवार से आकर क्रिकेट की दुनिया में छा जाने वाले महेंद्र सिंह धोनी का आज जन्मदिन है. टीम इंडिया को दो क्रिकेट वर्ल्ड कप दिलाने वाले महेंद्र सिंह धोनी 39 साल के हो गए हैं. 2004 में टीम इंडिया के लिए चुने जाने तक धोनी का जीवन चुनौतियों से भरा रहा. 'रांची के राजकुमार' के नाम से मशहूर धोनी एक बेहद साधारण से परिवार में पले बड़े, इस दौरान उन्हें अनेकों परेशानियों का सामना भी करना पड़ा. लेकिन उनके रास्ते के ये रोड़े क्रिकेट को लेकर उनके जुनून के सामने बौने साबित हुए. 

आज उनके जन्मदिन के मौके पर हम बता रहे हैं माही के नाम से चर्चित धोनी से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से...

दुबले-पतले होने के कारण बनना पड़ा विकेटकीपर

धोनी के परिवार की जड़ें उत्तराखंड में हैं. उनके पिता पान सिंह 1964 में रांची स्थित मेकॉन (MECON) में जूनियर पद पर नौकरी मिलने के बाद यहीं के होकर रह गए. वरिष्ठ पत्रकार राजदीप सरदेसाई अपनी किताब 'टीम लोकतंत्र' में लिखते हैं कि जिस वक्त धोनी का जन्म हुआ उस समय उनके पिता एक पम्प ऑपरेटर के तौर पर काम करते थे. उनका परिवार एक बेडरूम वाले घर में रहता था. धोनी उस समय टेनिस गेंद से क्रिकेट खेला करते थे.

धोनी बताते हैं कि बचपन में वो दुबले-पतले दिखते थे, इसलिए बाकी लड़के उन्हें विकेटकीपर बना दिया करते थे. धोनी स्कूल के दिनों में फुटबॉल और बैडमिंटन में दिलचस्पी रखते थे और बहुत दौड़ने में माहिर थे. यही कारण है कि कम उम्र में ही उनके पैरों में खूब ताकत आ गई.

छक्के मारकर तोड़ देते थे खिड़कियों के कांच

धोनी के स्पोर्ट्स टीचर केशव बनर्जी के मुताबिक माही बचपन से ही छक्के मारने में माहिर थे. वो स्कूल खत्म होने के बाद मैदान में पहुंच जाते थे और करीब 3 घंटे अभ्यास करते थे. स्कूल में अभ्यास के दौरान अक्सर वो पास बने घरों की खिड़कियों के कांच तोड़ देते थे और जब गार्ड पूछते थे, तो बहाना बना देते थे कि किसी और ने पत्थर मारा होगा.

मजबूरी में ट्रेन के टॉयलेट के पास सोकर किया सफर

राजदीप अपनी किताब में बताते हैं कि धोनी 2016-17 रणजी सीजन में ट्रेन से यात्रा कर रहे थे. जूनियर क्रिकेट के तौर पर वो कई बार बिना रिजर्वेशन वाले डिब्बों में सफर कर चुके थे. यहां तक कि धोनी को कई बार टॉयलेट के आसपास वाली जगहों में सोना पड़ता था. अब वो उस जगह पहुंच गए थे जहां उन्हें एसी के फर्स्ट क्लास डब्बे में सीट दी जा रही थी और साथ ही फैंस से बचने के लिए सिक्योरिटी भी मुहैया करवाई गई थी.

16 साल में ठोकी पहली डबल सेंचुरी

1997 में एक स्कूल टूर्नामेंट में 16 साल के धोनी ने डबल सेंचुरी ठोकी और अपने पार्टनर के साथ 378 रनों की साझेदारी की. मजे की बात यह है कि यह मैच 40 ओवरों का था. इसका फायदा यह हुआ कि धोनी को मेकॉन क्रिकेट क्लब में एंट्री मिल गई और उन्हें लोग पहचानने लगे. उनके टीचर बनर्जी के मुताबिक धोनी विकेट के पीछे बॉल को ऐसे लपकते थे जैसे एक मछली मुंह खोले गेंद को पकड़ने की कोशिश कर रही हो.

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