खुद असुरक्षित दूसरों के रखवाले!

भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो,
कहाँ तक चलोगे किनारे-किनारे!
(रज़ा हमदानी)

-शोएब गाज़ी

चाहे सर्द रातों का मौसम हो या चिलचिलाती धूप, या क्यों न रात का तीसरा पहर हो, जब हम नींद की आगोश में सो रहे हों तो आप की मित्र कही जाने वाली पुलिस नीदों को उचुक लेने वालों के खिलाफ रात के अंधेरों में भी पैनी नज़र रखती है कि आपकी नीदों में खलल ना पैदा हो। ज़रा सोचिए जब पुलिस वालों की ही सुरक्षा दांव पर लग जाए तो हमारा क्या होगा, जनाबे अली। यूपी में पुलिस पर हो रहे लगातार हमलों से खाखी वालों की जिन्दगी भी अजब फ़साना बन चुकी है। प्रदेश की योगी सरकार भले ही सत्ता में आते ही पूरे प्रदेश से भ्रष्टाचार, गुंडाराज, माफियाराज खत्म करने का दावा कर रही थी लेकिन चरमराती कानून व्यवस्था के सामने गुंडाराज चरम पर है। आम आदमी की क्या बिसात, जब पुलिसवाले भी सुरक्षित नहीं रह गए हैं। इसकी बानगी बुलंदशहर के चिंगरावठी चौकी पर उपद्रव और इन्स्पेक्टर सुबोध समेत दो लोगों की हत्या है।?
दरअसल यह कोई पहली घटना नहीं है जब खाकी पर हमला हुआ हो। अलग-अलग जिलों पर नजर दौड़ायें तो दर्जनों से भी ज्यादा हमले यूपी पुलिस पर इस साल हो चुके हैैं जिससे पुलिस और पुलिसिंग का हाल बेहाल नजर आया है। सीतापुर में जिला जज के चैंबर में दरोगा को जूते से पीटने और उसके बाद एसपी का मोबाइल छीनने के मामले में पुलिस और सरकार की अच्छी-खासी किरकिरी हो चुकी है, जिसको लेकर लगातार पुलिस फोर्स का मनोबल गिरता नजर आया है।   

पुलिस पर हुए कुछ हमले

1 पूर्व विधायक दिलीप वर्मा ने सीओ को चप्पल से पीटा -बहराइच  
2 विधायक मंजू त्यागी ने इंस्पेक्टर को जूतों से पीटने की दी धमकी -लखीमपुर
3 जिला जज व एसपी की मौजूदगी में वकीलों ने एसआई को जूतों से पीटा- सीतापुर
4 मेरठ महिला मित्र के साथ आए दारोगा को बीजेपी पार्षद ने जमकर पीटा -मेरठ
5 सिपाही समेत तीन दबंगों ने एसआई व कांस्टेबल को सरेराह लाठी-डंडों से पीटा —मुरादाबाद
6 बीजेपी विधायक की मौजूदगी में विधायक के करीबियों ने दारोगा को पीटा -लखनऊ
7 हिस्ट्रीशीटर के बेटे ने एसआई को पीटकर किया लहूलुहान -लखनऊ
8 महिला ने सरेराह चौकी इंचार्ज को पीटा -लखनऊ

अब सवाल यह उठता है क्या खाक करेगी पुलिस हमारी सुरक्षा, जब खुद पुलिस ही असुरक्षित है। पुलिस पर हो रहे लगातार हमलों से खाखी का मनोबल दिन-प्रतिदिन गिरता जा रहा है। सरकार पर सवाल पे सवाल तो दागे जा रहे हैं पर जवाब में प्रदेश के मुख्‍यमंत्री कहते हैं कि विपक्ष उनकी सरकार को बदनाम करने की साजिश रच रही है। तो वहीं आला अफसरों कहना है पुलिस का काम तो वैसे ही जोखिमभरा होता है। कलम को विराम को देते-देते रज़ा हामदनी की शायरी फिर से दोहराना चाहता हूं कि भँवर से लड़ो तुंद लहरों से उलझो, कहां तक चलोगे किनारे-किनारे।

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