हाड़ कंपाने वाली सर्दी की तमाम वजहों में से ग्लोबल वार्मिंग भी बड़ा कारक

कड़ाके की ठंड से जनजीवन बेहाल हुआ। जीवन का हर पहलू इसके प्रतिकूल असर से हलकान रहा। रिकॉर्ड टूटे। मौसम विभाग बताता है कि 119 साल पहले ऐसा जाड़ा पड़ा था। केवल सर्दी की बात नहीं है। गर्मी और बरसात के मौसम में भी ऐसे ही रिकॉर्ड टूटते हैं। कम समय में अधिकाधिक बारिश का और गर्मी में दिनोंदिन रिकॉर्ड तोड़ता पारा। इस हाड़ कंपाने वाली सर्दी की तमाम वजहों में से ग्लोबल वार्मिंग भी कारक माना गया।

वैज्ञानिकों ने सिद्ध कर दिया है कि मौसम के सहज रूप-रंग में आई ये विकृति ग्लोबल वार्मिंग के चलते ही है। वे इसका इलाज भी सुझाते हैं। तमाम उपायों में धरती को फिर से उसके गहने यानी हरियाली से आच्छादित करना इसका कुदरती कारगर समाधान है। साल 2020 की पूर्व संध्या पर इस दिशा में खुशखबरी भी मिली। पिछले दो साल में देश के वन क्षेत्र में पांच हजार वर्ग किमी की वृद्धि हुई है। देश का 21.67 फीसद हिस्सा हरियाली से आच्छादित हो चुका है। पेड़ों के तनों में कार्बन डाईआक्साइड सोखने की अद्भुत क्षमता होती है। हरियाली के अभाव में यही कार्बन उत्सर्जन वायुमंडल में जाकर मौसम को गड़बड़ा रहा है।

मवेशियों के लिए चारा 

27 करोड़ मवेशियों को चारा उपलब्ध कराते हैं। हालांकि इससे 78 फीसद जंगलों को नुकसान पहुंच रहा है। 18 फीसद जंगल बुरी तरह से प्रभावित हो रहे हैं। ये हर साल जानवरों के लिए 74.1 करोड़ टन चारा उपलब्ध कराते हैं।

 

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