गहलोत बनाम पायलट :राज्यपाल और विधानसभा अध्यक्ष पर सबकी नजरें, एक्सपर्ट से समझिए आगे क्या-क्या हो सकता है

प्रदेश में विद्रोह का झंडा उठाने वाले कांग्रेस के 19 विधायकों के समर्थन वापस लेने के बावजूद मुख्यमंत्री अशोक गहलोत अपनी सरकार बचा पाएंगे या नहीं? अब पूरा दारोमदार विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी व राज्यपाल कलराज मिश्र पर निर्भर हो गया है। 19 बागी विधायकों की सदस्यता समाप्त करने का अधिकार जोशी के पास में है तो बहुमत साबित करने के लिए विधानसभा सत्र बुलाने का अधिकारी राज्यपाल के पास। ऐसे में क्या समीकरण बनेंगे या बिगड़ेंगे? इस पर सभी की निगाहें जमी हुई हैं।

ये कदम उठा सकते हैं विधानसभा अध्यक्ष
कांग्रेस की याचिका पर विधानसभा सचिवालय ने आज बागी हुए 19 सदस्यों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 17 जुलाई की दोपहर एक बजे तक इन सदस्यों को अपना जवाब पेश करना है। जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ प्रो. दिनेश गहलोत का कहना है कि इस मामले में डॉ. जोशी इन सदस्यों का जवाब सुनने या जवाब नहीं मिलने की स्थिति में सदस्यता समाप्त कर सकते हैं। इसका उन्हें अधिकार है।

अगर 19 विधायकों की सदस्यता खत्म होती है। तब सदन में विधायकों की संख्या 181 रह जाएगी और बहुमत साबित करने का आंकड़ा 91 रह जाएगा। ऐसे में अगर गहलोत खेमे से कुछ विधायक टूट भी गए तो वह बहुमत साबित कर सकते हैं। लेकिन, अगर भाजपा सक्रिय होती है और कुछ निर्दलीय और कांग्रेस विधायक सरकार के खिलाफ जाते हैं तो गहलोत मुश्किल में आ जाएंगे।

पायलट समर्थक हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं
सदस्यता समाप्त होने पर ये 19 विधायक इस मामले को हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देंगे। हो सकता है कि कोर्ट से इन सदस्यों को स्टे मिल जाए या इन्हें फ्लोर टेस्ट में शामिल होने की इजाजत मिल जाए। एक प्रावधान यह भी है कि बागी विधायकों के साथ समझौता होने की स्थिति में कांग्रेस चाहे तो 15 दिन के भीतर अपनी याचिका को वापस ले सकती है। फ्लोर टेस्ट से पहले 19 विधायकों की सदस्यता समाप्त होने पर कांग्रेस के लिए विधानसभा में बहुमत साबित करना बहुत आसान हो जाएगा।

राज्यपाल बिगाड़ सकते हैं कांग्रेस का खेल
आमतौर पर मंत्री परिषद की सिफारिश पर राज्यपाल विधानसभा सत्र बुलाने की तारीख तय करते हैं। एक्सपर्ट दिनेश गहलोत का कहना है कि विशेष हालात में राज्यपाल खुद भी फैसला ले सकते हैं। राज्यपाल स्पीकर के 19 विधायकों की सदस्यता खत्म करने के तुरंत बाद भी बैठक बुला सकते हैं।

राज्यपाल स्पीकर के फैसले के बाद विधानसभा का विशेष सत्र बुलाने के बीच थोड़ा समय भी दे सकते हैं। ऐसे में सदस्यता गंवाने वाले विधायक कोर्ट जा जा सकते हैं। इससे पायलट खेमे और भाजपा को सरकार गिराने के लिए थोड़ा वक्त मिल सकता है। राज्यपाल गहलोत सरकार से कब बहुमत साबित करने को कहते हैं, इसकी टाइमिंग पर भी बहुत कुछ निर्भर करेगा।

फ्लोर टेस्ट में क्या-क्या हो सकता है?
कांग्रेस के 107 सदस्यों में से पायलट खेमे के 19 विधायक कम करने पर गहलोत सरकार के पास कांग्रेस के 88 सदस्यों का समर्थन है। निर्दलीय व अन्य छोटे दलों को मिलाकर वे बहुमत का दावा कर रहे है। लेकिन, असली परीक्षा विधानसभा के फ्लोर टेस्ट के दौरान होगी। यदि 19 बागी बैठक में शामिल हुए तो ये तय है कि वे गहलोत सरकार के खिलाफ मतदान करेंगे।

ऐसी स्थिति में सारा दारोमदार निर्दलीय व छोटे दलों के विधायकों पर निर्भर हो जाएगा। उनसे से कुछ सदस्यों के भाजपा या पायलट से हाथ मिलाने की स्थिति में मुख्यमंत्री गहलोत अपनी सरकार नहीं बचा पाएंगे। विधानसभा अध्यक्ष के इन 19 सदस्यों की सदस्यता समाप्त करने के एक-दो दिन के भीतर यदि फ्लोर टेस्ट हआ तो कांग्रेस अपनी सरकार बचा ले जाएगी। एक बार बहुमत साबित करने के बाद छह माह तक उसे दोबारा बहुमत साबित नहीं करना पड़ेगा।

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