गलवान से लेकर पैंगॉन्ग तक... जानिए भारत और चीन के बीच क्यों नहीं सुलझ रहा विवाद

लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तनातनी के बीच भारतीय सेना और चीनी सेना के प्रतिनिधिमंडल लेह के चुशुल में बातचीत कर रहे हैं. सूत्रों की मानें तो बैठक का एजेंडा दोनों देशों के बीच सेनाओं के पीछे हटाने के मुद्दे को आगे बढ़ाना है. अब ऐसे में सवाल उठता है कि दो दौर की बातचीत के बाद भी तनाव कम क्यों नहीं हो रहा है.

दरअसल, दोनों देशों के बीच कई मसलों पर सहमति नहीं बन पा रही है. गलवान घाटी और पैंगॉन्ग झील के पास से दोनों सेनाएं अभी पीछे नहीं हट रही है. पैंगॉन्ग झील से भारतीय सेना पीछे हटना नहीं चाहती है. भारतीय सेना फिंगर-4 में है, यह इलाका हमेशा से भारत के कंट्रोल में रहा है. भारत ने फिंगर-8 पर एलएसी होने का दावा किया है.

LAC तनाव पर भारत-चीन के सैन्य अधिकारियों के बीच चुशूल में बातचीत शुरू

मौजूदा समय में चीनी सेना फिंगर-4 में डटी हुई है और वहां पर बंकर बना रही है. फिंगर-4 से फिंगर-8 के बीच की दूरी 8 किलोमीटर है और इस पूरे इलाके में चीनी सेना की ओर से बंकर और निगरानी चौकियां बनाई गई हैं. चीनी सेना फिंगर-4 से पीछे नहीं हट रही है. ठीक इसी तरह गलवान घाटी के पेट्रोल प्वाइंट-14 से भी चीनी सेना पीछे नहीं हट रही है.

पैंगॉन्ग और गलवान की तरह डेपसांग और डेमचोक पर भी चीनी सेना पीछे नहीं हट रही है. सैन्य कमांडर के बीच हुई पिछली बैठक में चीन ने कहा था कि वह गलवान में क्लेम लाइन से 800 मीटर दूर है. 22 जून को हुई बैठक में चीन ने कहा था कि गलवान के पीपी-14 से बस 100-150 मीटर ही अंदर वह आए थे.

पीपी-14 वही जगह है, जहां 15 जून की रात को दोनों सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई थी. इस खूनी झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे, जिसमें 16 बिहार रेजीमेंट के कमांडिग अफसर कर्नल बी संतोष बाबू भी शामिल थे. हालांकि चीन की ओर से जवानों के हताहत होने का कोई आधिकारिक बयान नहीं जारी किया गया था.

भारत की ओर से पीपी-14 पर एलएसी होने का दावा किया जाता है. दोनों देशों के बीच हुए समझौते के अनुसार, सेनाएं एलएसी तक पेट्रोलिंग कर सकती हैं, लेकिन कैंप नहीं लगा सकती है. समझौते को तोड़ते हुए चीनी सेना ने एलएसी पर अपना तंबू लगा लिया है. इसके बाद भारतीय सेना ने मिरर तैनाती की है.

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