राज्य सभा में मनमोहन सिंह की वापसी की कोशिश में जुटी कांग्रेस।

कांग्रेस की लगातार हुई हार के सिलसिले का खामियाजा अब पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह को भुगतना पड़ रहा है. सन 1991 में नरसिम्हा राव सरकार में सीधे बतौर वित्त मंत्री सियासत की शुरुआत करने वाले अर्थशास्त्री मनमोहन सिंह पहली बार तभी राज्यसभा के ज़रिए असम में संसद पहुंचे थे.

इसके बाद से मनमोहन सिंह लगातार 5 बार राज्यसभा के लिए चुने जाते रहे. इस बीच एक बार मनमोहन सिंह ने लोकसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन हार गए. पीएम पद पर रहते हुए भी वो असम से राज्यसभा सांसद रहे, लेकिन अब 30 साल बाद मनमोहन का कार्यकाल खत्म हो गया है. आने वाले सत्र में मनमोहन सिंह राज्यसभा में नज़र नहीं आएंगे.

दरअसल, असम में कांग्रेस और बदरुद्दीन अजमल की पार्टी के विधायक मिलकर भी पहली पसंद के 43 के आंकड़े तक नहीं पहुंचे इसलिए इस बार मनमोहन सिंह वहां से सांसद नहीं बन सकते हैं. जबकि कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के मुताबिक, अर्थशास्त्री और अनुभवी मनमोहन सिंह की संसद में जरूरत है, इसलिए पार्टी चाहेगी कि वो जल्द से जल्द संसद में वापसी करें. लेकिन दिक्कत ये है कि जिन जगहों में राज्यसभा के चुनाव हैं, वहां कांग्रेस के पास जरूरी नंबर नहीं हैं.

कांग्रेस के रणनीतिकार कोशिश में हैं कि डीएमके के साथ मिलकर कांग्रेस तमिलनाडु से मनमोहन के लिए राज्यसभा के जुगाड़ हो जाए, लेकिन अभी तक चर्चा सफलता तक नहीं पहुंच पाई है. वहीं, गुजरात में दो सीटों पर चुनाव है, जहां एक कांग्रेस के कोटे में आ सकती है. लेकिन जिस तरह एक सीट के लिए अहमद पटेल को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा, जबकि वो गुजरात से ही आते थे. ऐसे में बाहरी मनमोहन को मोदी-शाह के गृह राज्य से जिता कर लाना पार्टी के लिए आसान नहीं होगा.

इसके अलावा उड़ीसा और बिहार से कांग्रेस को सीट मिलने की संभावना नहीं है. ऐसे में अगर तमिलनाडु या गुजरात से बात नहीं बनी तब मनमोहन को अगले साल अप्रैल तक इंतज़ार करना होगा, जब राज्यसभा की सीटों के लिए कांग्रेस शासित राज्यों में चुनाव होंगे. बता दें कि कांग्रेस का सबसे बड़ा नाम और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का कार्काल खत्म होने के बाद करीब 28 साल बाद संसद में नहीं दिखाई देंगे.

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