संबंधों में खटास से निवेश पर पड़ेगा असर? जानें FDI के आंकड़ों

भारत और चीन के बीच बॉर्डर पर जारी तनाव का असर अब दोनों देशों के संबंधों में दिखने लगा है. साथ ही साथ अब बात दोनों देशों के बीच होने वाले व्यापार पर आ गई है. ऐसे में इस बात पर सवाल खड़े हो रहे हैं कि चीन से बिगड़ते संबंध के बीच भारत में निवेश को लेकर काफी परेशानी आएगी. लेकिन आंकड़े इससे अलग गवाही देते हैं.

आंकड़ों के मुताबिक, भारत में जो विदेशी निवेश यानी FDI आता है उसमें चीन का सिर्फ 0.5 फीसदी का ही हिस्सा है. इतना ही नहीं चीन उन टॉप दस देशों की लिस्ट में भी शामिल नहीं है, जहां से सबसे अधिक FDI भारत में आती है.

इन्वेस्टमेंट के आधार पर देखें, तो चीन का नंबर 18वां है. जो कि लक्समबर्ग और साइप्रस जैसे देश से भी पीछे है.

चीनी सामान और चीनी टेक्नोलॉजी को लेकर भारत पहले से ही सतर्कता बरत रहा है. अप्रैल 2020 के बाद से भारत सरकार ने चीन से आने वाले निवेश पर एक खिड़की लगा दी है. यानी अगर चीन की कोई कंपनी भारत में बड़ा निवेश करना चाहेगी तो वह सीधा किसी राज्य सरकार या कंपनी से करार नहीं कर सकती, उसे भारत सरकार से परमिशन जरूर लेनी होगी.

आपको बता दें कि गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच जो भिड़ंत हुई थी, उसमें भारत के 20 जवान शहीद हो गए थे. इसी के बाद देश में चीन के खिलाफ गुस्सा है, लोग चीन के सामान का बहिष्कार कर रहे हैं.

इस बीच सरकार की ओर से भी सख्ती बरती जा रही है. भारत सरकार के रेल मंत्रालय और संचार विभाग ने चीनी कंपनी को दिया ऑर्डर या तो रद्द कर दिया है, या फिर दोबारा टेंडर जारी करने की बात कही है.

इसके अलावा बीते दिनों ही सरकार ने सुरक्षा का हवाला देते हुए कुल 59 चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन कर दिया है. जिसमें टिकटॉक, शेयर इट जैसी पॉपुलर ऐप भी शामिल हैं और इनका भारत में बड़ा कारोबार था.

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