बच्चों के साथ बनिये बच्चा, स्ट्रेस होगा छूमंतर....

लखनऊ: कहते हैं अगर आपको अपना स्ट्रेस दूर करना हो तो बच्चों के कुछ देर खेल लीजिये उनकी जो मनमोहक मुस्कान होती है और जिस तरह से वो खेलते हैं उसे देखकर आप अपनी तकलीफ भूल जायेंगे और उनके साथ बच्चे बन जायेंगे। उनसे दोस्ती निःस्वार्थ होती है। उनकी दोस्ती में कोई छलावा नहीं होता। आप क्या करते हैं, कैसे हैं इन सब से उनका कोई वास्ता नहीं होता है। बच्चों के साथ को जिम्मेदारी के बजाय मजे और सीख के लहजे से देखने की आदत डालें। इसके लिए आपको मस्ती के भी वो रंग चुनने होंगे, जो बच्चों के पसंदीदा हों। जैसे उन्हें अगर कॉमेडी फिल्म नहीं देखनी है तो उन्हें डोरेमोन ही देखने दें। आप भी उसके साथ देखें। देखने में मजा भी आएगा और आप दोनों का रिश्ता भी मजबूत होगा।

जब हम सब बच्चे थे तो सिर्फ एक टेंशन हुआ करती थी, स्कूल और उसका होम वर्क। पर यह बात ज्यादा देर मन में रह नहीं पाती थी। दोस्तों के साथ खेल की शुरुआत होते ही ये टेंशन मानो छूमंतर हो जाया करती थी। पर यही तनाव छूमंतर करने की कला बड़े होते हुए हम भूल जाते हैं। थोड़ा खुद को समझाइए और अपने आसपास नजर घुमाइए। आपको टेंशन भगाने का इलाज मिल जाएगा। ये इलाज हैं, आपके बच्चे। वही बच्चे, जो प्यारे तो बहुत होते हैं, पर उनकी ज्यादा शैतानी के बाद उनसे उलझन भी होती है। अगर आपको बिना तनाव वाली चाहिए तो घर के बच्चों में सुकून की तलाश शुरू कर दीजिए।

  • आप भी बच्चों के साथ बच्चे बन जाइऐ, उनके साथ मस्ती कीजिए, उनकी शैतानियों में शामिल हो जाइऐ।
  • हम सब जानते हैं कि बच्चे खेल-खेल में अपनी सारी उलझनें भूल जाते हैं। कैसे शिकायतों का पिटारा लेकर बैठा बेटा जब खेल कर लौटता है, तो आप अमूमन उसे दूसरी ही दुनिया में पाते हैं।
  • आपका दिमाग हमेशा कुछ न कुछ सोचता ही रहता है। कभी यहां, तो कभी वहां तक इसकी दौड़ जारी ही रहती है। ऐसे में अपने दिमाग से कहिए कि कुछ देर शांत हो जाए। और ये तब ही दौड़ लगाए, जब आप अपने बच्चे के साथ टीवी देखते हुए मजे कर रहे हों।
  • बच्चे कार्टून को कितना पसंद करते हैं, ये माता-पिता से बेहतर कौन जानता है। कैसे बच्चे कार्टून कैरेक्टर में खुद को महसूस करने लगते हैं। कैसे उन्हें पूरी दुनिया कार्टून जैसी आसान लगती है। बस आपको बिल्कुल ऐसा ही महसूस करना है। आपको वैसा एहसास करना है, जैसे किसी कार्टून का मुख्य किरदार करता है। जैसे डोरेमॉन या नोबिता। कुछ देर के लिए ही सही, मान लीजिये आप नोबिता हैं। उतने ही शैतान, बेफिक्र और उतने ही नादान। ऐसा करने से आपको भी स्फूर्ति का अनुभव होगा और बच्चे को भी खुशी मिलेगी।

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