बसंत पंचमी: जानें पूजन की तिथि, समय और विधि...

बसंत पंचमी को ही सरस्वती पूजा भी कहा जाता है। कहा जाता है कि इस दिन माँ सरस्वती ने धरती पर अवतरित होकर ज्ञान का प्रकाश अपने चारों ओर फैलाया था। पर इस बार एक अजीब सी उलझन है लोगों के बीच कुछ लोग का कहना है कि पंचमी 9 को है तो वहीं कुछ लोग कह रहे हैं 10 को है।

माँ सरस्वती की कथा-

कहते हैं इसी दिन मां सरस्वती ने संसार में अवतरित होकर ज्ञान का प्रकाश जगत को प्रदान किया था। तब से इस दिन बसन्तोत्सव उल्लास पूर्वक मनाया जाता है। इसके बारे में एक कथा है कि जब ब्रह्मा जी ने जगत की रचना की तो एक दिन वे संसार में घूमने निकले। वे जहां भी जाते लोग इधर से उधर दिखाई देते तो थे पर वे मूक भाव में ही विचरण कर रहे थे। इस प्रकार इनके इस आचरण से चारों तरफ अजीब शांति विराज रही थी। यह देखकर ब्रह्मा जी को सृष्टि में कुछ कमी महसूस हुई। वह कुछ देर तक सोच में पड़े रहे फिर कमंडल में से जल लेकर छिड़का तो एक महान ज्योतिपुंज सी एक देवी प्रकट होकर खड़ी हो गई। उनके हाथ में वीणा थी। वह महादेवी सरस्वती थीं उन्हें देखकर ब्रह्मा जी ने कहा तुम इस सृष्टि को देख रही हो यह सब चल फिर तो रहे हैं पर इनमें परस्पर संवाद करने की शक्ति नहीं है। महादेवी सरस्वती ने कहा तो मुझे क्या आज्ञा है। ब्रह्मा जी ने कहा देवी! तुम इन लोगों को वीणा के माध्यम से वाणी प्रदान करो (यहां ध्यान देने योग्य है कि वीणा और वाणी में यदि मात्रा को बदल दिया जाए तो भी न एक अक्षर घटेगा न बढ़ेगा) और संसार में व्याप्त इस मूकता को दूर करो।

पीले वस्त्र धारण कर विधि-विधान से पूजा-

इस त्योहार का सर्वाधिक उत्साह पूर्वी भारत, पश्चिमोत्तर बांग्लादेश, नेपाल और और कई राज्यों में  विधि-विधान और बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन महिलाएं पीले वस्त्र धारण करती हैं। मान्यता है कि इस दिन जो भी मनुष्य पूरे मन और विधि से मां सरस्वती का आराधना करता है वे उसकी मनोकामना अवश्य ही पूर्ण करती हैं। विद्या और संगीत की देवी मां सरस्वती की पूजा प्रत्येक स्थान पर की जाती है।

पेन, कॉपी, किताबों की भी पूजा-

बसंत पंचमी के दिन पेन, कॉपी, किताबों की भी पूजा की जाती है। ऐसा करने से देवी सरस्वती वरदान प्रदान करती हैं। भारत देश के सरस्वती, विष्णु और शिव मंदिरों में इस त्योहार का उत्साह सर्वाधिक होता है। अधिकांश स्थानों पर मेले आयोजित किए जाते हैं, जो मुख्यतः संबंधित देवी-देवता को ही समर्पित होते हैं।

पूजा का समय-

शास्त्रों में पूर्वाह्न पूर्व सरस्वती पूजन करने  का नियम बताया गया है इसलिए 10 तारीख को सुबह 6 बजकर 45 मिनट से दोपहर 12 बजकर 25 मिनट तक सरस्वती पूजन करना शुभ मंगलकारी होगा।

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