पाने से ज्यादा टिकाऊ होती हैं देने की खुशी

नई दिल्ली: दूसरों को कुछ देने से प्रतिष्ठा बनाए रखने में मदद मिलती है और सामाजिक जुड़ाव तथा अपनेपन की भावना भी मजबूत होती है। एक विशेष घटना,गतिविधि या कुछ पाने के बाद हम जो खुशी महसूस करते हैं,वह ज्यादा देर तक टिकाऊ नहीं रहती, इसके विपरीत जब हम दूसरों को कुछ देते हैं,तो उसकी खुशी का अहसास लंबे समय तक बना रहता है। ऐसा एसोसिएशन फॉर साइकोलॉजिकल साइंस की एक पत्रिका 'साइकोलॉजिकल साइंस' में प्रकाशित दो अध्ययनों के अनुसार कहा गया है।मनोविज्ञान के शोधकर्ता एड ओ'ब्रायन(यूनिवर्सिटी ऑफ शिकागो बूथ स्कूल ऑफ बिजनेस)और सामंथा कासीरर(नॉर्थ वेस्टर्न यूनिवर्सिटी केलॉग स्कूल ऑफ मैनेजमेंट) ने पाया कि अध्ययन में शामिल उन प्रतिभागियों की खुशी में गिरावट नहीं हुई या बहुत धीमी गिरावट आई,जिन्होंने बार-बार दूसरों को उपहार दिए,वहीं जो प्रतिभागी बार-बार उपहार प्राप्त कर थे,उनकी खुशी में धीरे-धीरे गिरावट दर्ज की गई। शोध से पता चलता है कि ग्रहण करने की तुलना में बार-बार देने की प्रवृत्ति अधिक मायने रखती है।

एक प्रयोग में,विश्वविद्यालय के छात्र प्रतिभागियों को पांच दिनों के लिए हर दिन पांच डॉलर प्राप्त हुए। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को बेतरतीब ढंग से या तो खुद पर या किसी और पर पैसा खर्च करने के लिए कहा। जैसे कि कैफे में टिप जार में पैसा छोड़ना या हर दिन चैरिटी के लिए दान करना। प्रतिभागियों ने प्रत्येक दिन के अंत में अपने खर्च के अनुभव और समग्र खुशी पर फोकस किया। कुल 96 प्रतिभागियों के डाटा ने स्पष्ट पैटर्न दिखाया कि जिन प्रतिभागियों ने खुद पर पैसा खर्च किया,उन्होंने अपनी खुशी में लगातार गिरावट दर्ज की,लेकिन उन लोगों की खुशी फीकी नहीं पड़ी,जिन्होंने पैसा किसी और को दे दिया।

 

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