कोरोना मरीजों के लिए एंटीबॉडी है जरूरी, समझें क्या है प्लाज्मा की पूरी थ्योरी

कोरोना वायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले लिया है. दुनिया के तमाम मुल्क, जहां अब इस वायरस से धीरे-धीरे मुक्त हो रहे हैं, वहीं भारत में ये अब भी तेजी से फैल रहा है. देश में कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों का आकंड़ा 10 लाख से पार चला गया है.

सबसे बड़ी चिंता ये है कि कोरोना की कोई वैक्सीन अब तक नहीं बन पाई है. कुछ मरीजों पर प्लाज्मा थेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है. इसके बेहतर रिजल्ट भी देखने को मिले हैं. प्लाज्मा थेरेपी को एक रेस्क्यू ट्रीटमेंट के तौर पर देखा जा रहा है. ऐसे में ये समझना भी जरूरी है कि प्लाज्मा क्या है, प्लाज्मा थेरेपी क्या है, कोरोना से ठीक हुए मरीज कैसे प्लाज्मा देते हैं और कोरोना वायरस मरीज को ठीक करने के लिए कैसे इसका इस्तेमाल किया जाता है.

इस मसले पर दिल्ली स्थित लोक नायक (LNJP) अस्पताल के मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉक्टर सुरेश कुमार ने तफ्सील से जानकारी दी. डॉक्टर सुरेश कुमार ने बताया, ''ब्लड में तीन कंपोनेंट्स होते हैं. रेड ब्लड सेल्स (लाल रक्त कोशिका), प्लेटलेट्स और प्लाज्मा. पूरे शरीर के ब्लड का 55 फीसदी प्लाज्मा होता है. ब्लड में जो ऊपरी पीला तरल पदार्थ होता है, वो प्लाज्मा होता है. ये हर इंसान के अंदर पाया जाता है.

कोरोना से ठीक हुए मरीज के प्लाज्मा और आम इंसान के प्लाज्मा में फर्क ये होता है कि जब मरीज कोरोना से ठीक हो जाता है उसमें एंटीबॉडी बनते हैं. यही एंटीबॉडी दूसरे कोरोना संक्रमित के काम आते हैं, जो वायरस को नष्ट करते हैं. जब कोरोना संक्रमित रहे शख्स से ब्लड लिया जाता है तो मशीन से फिल्टर कर ब्लड से प्लाज्मा, रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स को अलग कर लिया जाता है. रेड ब्लड सेल्स और प्लेटलेट्स उसी व्यक्ति के शरीर में वापस डाल दिया जाता है, जिसने प्लाज्मा दान किया और प्लाज्मा स्टोर कर लिया जाता है.''

कैसे लिया जाता है प्लाज्मा?

दिल्ली में देश का पहला प्लाज्मा बैंक ILBS में शुरू किया गया था, जिसके बाद अब LNJP अस्पताल में भी प्लाज्मा बैंक चालू हो गया है. एलएनजेपी में किस तरह प्लाज्मा लिया जा रहा है और कैसे कोरोना मरीजों को प्लाज्मा थेरेपी दी जा रही है, इस पर भी डॉक्टर सुरेश कुमार ने विस्तार से पूरी प्रक्रिया बताई.

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