चीन ही नहीं सरकार पर जब-जब हमलावर हुई कांग्रेस, मोदी के रक्षाकवच बने शरद पवार

लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 जवानों की शहादत को लेकर कांग्रेस सख्त तेवर अख्तियार किए हुए है. कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर हैं और एक के बाद एक सवाल खड़े कर रहे हैं. ऐसे में कांग्रेस के सहयोगी एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने चीन मामले पर मोदी सरकार के बचाव और राहुल गांधी को ही आईना दिखाने का काम किया है. हालांकि, चीन ही नहीं बल्कि मोदी सरकार को कांग्रेस जब-जब घेरने की कोशिश की है तो शरद पवार हर बार मोदी के रक्षा कवच बनकर सामने खड़े नजर आए हैं.

कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शुक्रवार को कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस बारे में सच बोलें और अपनी जमीन वापस लेने के लिए कार्रवाई करें तो पूरा देश उनके साथ खड़ा होगा. इस पर एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने कहा, 'हम नहीं भूल सकते कि 1962 में क्या हुआ था. चीन ने हमारी 45 हजार स्क्वेयर किमी जमीन पर कब्जा कर लिया था. यह जमीन अब भी चीन के पास है, लेकिन वर्तमान में मुझे नहीं पता कि चीन ने जमीन ली है या नहीं, मगर इस पर बात करते वक्त हमें इतिहास याद रखना चाहिए. राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर राजनीति नहीं करनी चाहिए.

पवार ने कहा कि यह किसी की नाकामी नहीं है. अगर गश्त करने के दौरान कोई है, तो वे किसी भी समय आ सकते हैं. हम यह नहीं कह सकते कि यह दिल्ली में बैठे रक्षा मंत्री की नाकामी है. उन्होंने कहा कि मुझे अभी युद्ध की कोई आशंका नहीं दिखती है. चीन ने जाहिर तौर पर हिमाकत तो की है, लेकिन गलवान में भारतीय सेना ने जो भी निर्माण कार्य किया है वह अपनी सीमा में किया है.

चीन मामले को लेकर पिछले दिनों हुई सर्वदलीय बैठक के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कई सवाल उठाए और कहा था कि अब भी देश एलएसी से जुड़े कई मुद्दों पर अंधेरे में है. कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने सवाल खड़े किए थे कि सैनिकों को बिना हथियार के किसने भेजा था. इस पर एनसीपी अध्यक्ष शरद पवार ने नसीहत देते हुए कहा कि चीन सीमा पर सैनिक हथियार लेकर गए थे या नहीं, यह अंतरराष्ट्रीय समझौतों द्वारा तय होता है. हम को ऐसे संवेदनशील मुद्दों का सम्मान करना चाहिए.

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