अमेरिका-तालिबान के बीच हुआ शांति समझौता

कतर की राजधानी दोहा में अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौते पर हस्ताक्षर हो गए. हालांकि अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी इस सीन में नजर नहीं आए. अमेरिका-तालिबान शांति समझौते पर अमेरिका के विशेष प्रतिनिधि जालमे खलीलजाद और तालिबान के कमांडर मुल्ला अब्दुल गनी बरादर ने हस्ताक्षर किए. वहीं, अमेरिका और तालिबान के बीच हुए शांति समझौते से पाकिस्तान बेहद खुश दिख रहा है. इसकी वजह यह है कि पाकिस्तान इस समझौते में अपना फायदा देख रहा है. पाकिस्तान और अफगान तालिबान के बीच करीबी रिश्ते रहे हैं, जबकि अफगानिस्तान की अशरफ गनी सरकार से पाकिस्तान की तनातनी हमेशा से रही है. अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी आतंकवाद के लिए हमेशा पाकिस्तान को जिम्मेदार ठहराते रहे हैं. बता दें कि 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले के बाद अमेरिका ने अफगानिस्तान में हमला किया था और तालिबान सरकार को उखाड़ फेंका था. उस समय से तालिबान अफगानिस्तान की सत्ता से बाहर है. करीब 18 साल तक चली जंग के बाद अमेरिका और तालिबान के बीच शांति समझौता हुआ है. इस समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका ने साफ कहा कि तालिबान को अलकायदा और दूसरे आतंकी संगठनों से अपने रिश्ते खत्म करने होंगे. तालिबान अफगानिस्तान की धरती को आतंकियों की पनाहगाह नहीं बनने देगा.

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