Saraswati puja: बसंत पंचमी पर पढ़ें सरस्वती वंदना और आरती

बसंत पंचमी के दिन देवी सरस्वती की शुभ मुहूर्त में पूजा और वंदना की जाती है। इस दिन सुबह नहाकर मां सरस्वती को पीले फूल अर्पित करें।  इस दिन पीले वस्त्र धारण करने चाहिए। पूजा स्थान पर वाद्य यंत्र व किताबें रखें। इस दिन पीले चावल या पीले रंग का भोजन करें। बच्चों को उच्चारण सिखाने के लिहाज से भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है। छह माह पूरे कर चुके बच्चों को अन्न का पहला निवाला भी इस दिन खिलाया जाता है। यहां पढ़ें सरस्वती वंदना

सरस्वती वंदना गीत-

वर दे, वीणावादिनि वर दे !
प्रिय स्वतंत्र-रव अमृत-मंत्र नव
        भारत में भर दे !

काट अंध-उर के बंधन-स्तर
बहा जननि, ज्योतिर्मय निर्झर;
कलुष-भेद-तम हर प्रकाश भर
        जगमग जग कर दे !

नव गति, नव लय, ताल-छंद नव
नवल कंठ, नव जलद-मन्द्ररव;
नव नभ के नव विहग-वृंद को
        नव पर, नव स्वर दे !

वर दे, वीणावादिनि वर दे।
 - सूर्यकांत त्रिपाठी "निराला"

सरस्वती पूजा की तिथि:
पंचमी तिथि दो दिन होने के कारण बहुत से लोगों में भ्रम की स्थिति की है कि यह त्यौहार कब मनाया जाएगा। बसंत पचमी की उदया तिथि 10 फरवरी को होने के कारण उत्तर प्रदेश समेत देश के अधिकांश हिस्सों में सरस्वती पूजा और बसंत पंचमी का पर्व 10 फरवरी को मनाया जाएगा। ज्योतिषात्रियों के अनुसार 10 फरवरी को ही बसंत पंचमी मनाना शास्त्र सम्मत है।

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