CBI गिरफ्तारी VS शारदा चिट-फंड घोटाला: ये राजनीति है, यहाँ जो है सगा, वही ठगा, उसी से दगा

-अंकित श्रीवास्तव

बीते 3 फरवरी की रात जब CBI को गिरफ्तार किया गया, तब से सियासी घमासान सा छिड़ गया है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ही इस मुद्दे पर आमने-सामने हो गए हैं। पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों के ही तेवरों को टिकाऊ मानना या फिर विश्वास करना मुश्किल होगा। क्योंकि, तृणमूल कांग्रेस के दो नेता जो बाद में भाजपा में शामिल हो गए, उनपर कार्रवाई न होना, CBI और भाजपा दोनों को ही शक के घेरे में खड़ा करती है। पर, आपको यहां रुकना होगा क्योंकि इसमें विपक्ष को भी दूध का धुला नहीं कहा जा सकताए।
8 मई 2014 को राहुल गांधी ने ट्वीट किया था कि पश्चिम बंगाल में 20 लाख लोगों ने चिटफंड स्कैम में अपना पैसा गंवाया। फिर, 2 अप्रैल 2016 को पश्चिम-बंगाल कांग्रेस के ट्विटर हैंडल से राहुल गांधी ने ट्वीट किया की सारधा घोटाला हुआ। यह देश के सबसे बड़े घोटाले में से एक है। इसके बावजूद ममता बनर्जी ने इस सम्बंध में मुंह नहीं खोला है। 19 अप्रैल 2016 को कांग्रेस के ही ट्विटर हैंडल से ट्वीट किया गया, इसमें राहुल गांधी के ही तस्वीर के साथ लिखा गया कि ममता जी ने कहा था की वह भ्रष्टाचार पर लगाम लगाएंगी। लेकिन कोई कार्रवाई करने के बजाय वह बंगाल को लूटने वालों को बचा रही हैं। 23 अप्रैल 2016 को कांग्रेस का एक और ट्वीट हुआ, इसमें ममता राज को ‘सिंडिकेट राज’ कहा जाता है। पर, कांग्रेस का इस मुद्दे पर तृणमूल का समर्थन करना समझ से परे है।
खैर यह तो बीती हुई बात है, पर इस बीती बात को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। क्योंकि सबकी राजनीतिक महत्वाकांक्षा, सत्ता तक ही है। फिर क्या भाजपा और क्या कांग्रेस।  

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