राहुल गांधी ने संभाली कांग्रेस की कमान, सोनिया गाँधी ने दिया आशीर्वाद

दिल्ली: राहुल गांधी कांग्रेस अध्यक्ष निर्वाचित हो गए हैं. राहुल गांधी के नाम का औपचारिक एलान कर दिया गया था. कांग्रेस दफ्तर के बाहर कार्यकर्ताओं का जमावड़ा लगा था. कांग्रेस दफ्तर पर कार्यकर्ता जश्न मना रहे थे. अध्यक्ष पद को राहुल गांधी के 89 प्रस्तावक रहे. देश के दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रस्तावक रहे. वहीँ आज राहुल गाँधी की ताजपोशी की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और राहुल गाँधी ने अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाले लिया है. सोनिया गाँधी, पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह व राबर्ट वाड्रा भाई पहुंचे हैं. प्रियंका गाँधी भी इस दौरान मौजूद रहीं.

पार्टी दफ्तर में जश्न का माहौल
- प्रोग्राम में प्रियंका-राहुल वाड्रा, मनमोहन सिंह समेत कई राज्यों से आए कांग्रेस नेता और वर्कर्स मौजूद रहे। पार्टी ऑफिस के बाहर कार्यकर्ताओं ने पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर जश्न मनाया। राहुल के पदभार संभालने से पहले कांग्रेस मुख्यालय के बाहर उनके बैनर-पोस्टर लगाए गए। देशभर से पार्टी वर्कर जश्न में शामिल होने के लिए 24 अकबर रोड पर इकट्ठे हुए।
- कांग्रेस वर्कर्स पटाखे फोड़कर और मिठाई बांटकर जश्न मना रहे हैं। ढोल-नंगाड़ों के साथ डांस कर रहे हैं।

राहुल के कांग्रेस प्रेसिडेंट बनने की अहमियत क्या है?
1) पहली बार: कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने नवंबर 2016 में एक रिजोल्यूशन पास कर राहुल को प्रेसिडेंट बनाने की सिफारिश की थी। 131 साल में ऐसा पहली बार हुआ था, जब CWC ने किसी नेता का नाम आगे बढ़ाया।
2) रिकॉर्ड प्रेसिडेंटशिप के बाद मिला चार्ज:सोनिया गांधी 1998 में कांग्रेस प्रेसिडेंट बनीं। उनके नाम सबसे लंबे वक्त तक अध्यक्ष पद पर बने रहने का रिकॉर्ड है। उनके 19 साल के कार्यकाल के दौरान 10 साल यूपीए की सरकार भी रही। राहुल ने उनके बाद चार्ज संभाला।
3) निर्विरोध चुनाव:2000 में कांग्रेस संगठन के चुनाव में सोनिया गांधी के खिलाफ जितेंद्र प्रसाद खड़े हुए। इसके बाद ऐसा कोई मौका नहीं आया, जब सोनिया को किसी नेता की चुनौती का सामना करना पड़ा हो। राहुल के साथ भी यही हुआ। वे निर्विरोध चुने गए।
4) बुरे दौर में कांग्रेस: कांग्रेस के पास इतिहास में सबसे कम 44 लोकसभा सीटें हैं। इमरजेंसी के पास पहली बार ऐसा हुआ है जब हिमाचल, पंजाब, कर्नाटक जैसे चुनिंदा 5 राज्यों में ही कांग्रेस की सरकार है।
5) कोई नंबर-2नहीं: बीते 19 साल में जब बागडोर सोनिया के पास थी तब प्रणब मुखर्जी, मनमोहन सिंह या राहुल गांधी अपने-अपने दौर में जाहिर तौर पर पार्टी में नंबर-2 थे। अब राहुल के प्रेसिडेंट बन जाने के बाद बड़ा सवाल यह है कि पार्टी में नंबर-2 कौन होगा।

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